Juniper Green Energy ने अपने IPO (Initial Public Offering) के साइज को घटाकर ₹1,800 करोड़ कर दिया है। पहले यह ₹3,000 करोड़ का प्लान था। रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी इस फंड का बड़ा हिस्सा अपने कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करेगी, जो ₹13,200 करोड़ से ऊपर जा चुका है। SEBI के नए नियमों के चलते यह संभव हो पाया है, जिससे कंपनियां अपने इश्यू साइज को बिना दोबारा फाइल किए बदल सकती हैं।
IPO साइज में बड़ी कटौती
गुरुग्राम की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Juniper Green Energy ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के साइज को काफी कम कर दिया है। कंपनी अब ₹3,000 करोड़ की जगह ₹1,800 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रख रही है। यह बदलाव भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा किए गए नियमों के बाद आया है। नए नियमों के तहत, कंपनियां प्रारंभिक दस्तावेज जमा करने के बाद अपनी फंड जुटाने की राशि में 50% तक बदलाव कर सकती हैं, बशर्ते वे कुछ शर्तों को पूरा करें।
कर्ज चुकाने पर मुख्य फोकस
इस घटे हुए IPO का मुख्य उद्देश्य कर्ज को कम करना है। कंपनी जुटाए गए फंड में से लगभग ₹1,411.9 करोड़ का इस्तेमाल खुद के और अपनी सहायक कंपनियों के मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए करेगी। यह कदम तब उठाया गया है जब कंपनी पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है। जून 2026 तक, कंपनी पर कुल ₹13,266 करोड़ का कंसोलिडेटेड कर्ज था, जो मई 2025 में ₹5,894.2 करोड़ था। निवेशक अक्सर इतने बड़े कर्ज के स्तर पर पैनी नजर रखते हैं, क्योंकि ज्यादा ब्याज भुगतान से कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और भविष्य के विस्तार के लिए उपलब्ध कैश फ्लो कम हो सकता है।
रेगुलेटरी बदलाव और IPO प्रक्रिया
कंपनी ने इस बदलाव के लिए SEBI के अपडेटेड फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया। 21 मई 2026 को बदलाव के लिए आवेदन करने के बाद, Juniper Green Energy को 19 जून 2026 को आवश्यक नियामक मंजूरी मिल गई। अपने मूल ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (जो जून 2025 में जमा किया गया था और सितंबर 2025 में स्वीकृत हुआ था) के एडेंडम का उपयोग करके, कंपनी ने कागजी कार्रवाई को दोबारा फाइल करने की लंबी प्रक्रिया से बचा लिया। IPO प्रक्रिया को ICICI Securities, HSBC Securities and Capital Markets (India), JM Financial, और Kotak Mahindra Capital Company जैसे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस का सिंडिकेट मैनेज कर रहा है।
बिजनेस ऑपरेशंस और भविष्य की राह
सिंगापुर स्थित AT Capital Group द्वारा समर्थित Juniper Green Energy एक इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर के तौर पर काम करती है। जनवरी 2026 तक, कंपनी की ऑपरेशनल कैपेसिटी लगभग 1.66 गीगावाट-पीक (GWp) थी। भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेंसिव है, जिसमें नए सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है। निवेशकों के लिए, कंपनी की पब्लिक एंटिटी बनने की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने भारी कर्ज के बोझ को कैसे मैनेज करती है और साथ ही कॉम्पिटिटिव सेक्टर में अपनी ऑपरेशनल कैपेसिटी का विस्तार जारी रखती है। भविष्य में, कंपनी की लाभ मार्जिन बनाए रखने की क्षमता, भारी ब्याज लागत के बीच, और रेवेन्यू ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए नए पावर प्रोजेक्ट्स को चालू करने की वास्तविक समय-सीमा पर नजर रखी जाएगी।
