Jio Platforms अपने **$108.3 बिलियन** के भारी-भरकम IPO की तैयारी में है। हालांकि, नए फाइलिंग्स से पता चला है कि कंपनी अपने कामकाज, डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पूरी तरह से पेरेंट कंपनी Reliance Industries पर निर्भर है, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर हो सकता है।
Jio Platforms, जो कि Reliance Industries की टेलीकॉम इकाई है, अब $108.3 बिलियन के वैल्युएशन के साथ मार्केट में कदम रखने की तैयारी कर रही है। 533 मिलियन ग्राहकों वाली इस कंपनी का बिजनेस मॉडल भारतीय टेलीकॉम मार्केट की दिग्गज कंपनी Bharti Airtel से काफी अलग है। यह कंपनी खुद का अलग नेटवर्क बनाने के बजाय अपने ग्रुप की कंपनियों के साथ मिलकर काम करती है।
डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल का बड़ा कनेक्शन
Jio का पूरा प्रीपेड डिस्ट्रीब्यूशन Reliance Retail के जरिए होता है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, इस सेगमेंट ने ₹1.13 लाख करोड़ का रेवेन्यू दिया, जो Jio के कुल कारोबार का लगभग 77% है। यह मॉडल लागत कम करने में तो मदद करता है, लेकिन अगर रिटेल आर्म के साथ कोई भी दिक्कत आती है, तो Jio को अपना नेटवर्क जीरो से तैयार करने में भारी खर्च करना पड़ेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और इक्विपमेंट पर पकड़
Jio के मोबाइल टावर और फाइबर केबल जैसे एसेट्स का रखरखाव Summit Digitel और Jio Digital Fibre जैसी ग्रुप कंपनियां करती हैं। इतना ही नहीं, जून 2026 की तिमाही में Jio का 36% नॉन-स्पेक्ट्रम कैपिटल खर्च रिलायंस ग्रुप और Sanmina-SCI India जैसे सहयोगियों को गया। यह सेंट्रलाइजेशन कंट्रोल तो देता है, लेकिन कंपनी को ग्रुप के लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में बांधकर रखता है।
ब्रांड और भविष्य की चिंताएं
दिलचस्प बात यह है कि 'Jio' ब्रांड का मालिकाना हक Reliance Industries के पास है। फिलहाल इसके लिए कोई रॉयल्टी नहीं ली जा रही है, लेकिन भविष्य में यह स्थिति बदल सकती है। निवेशकों के लिए असली चुनौती यह है कि कंपनी रिलायंस ग्रुप के साथ कितनी गहराई से जुड़ी हुई है। ग्रुप को होने वाली कोई भी नियामक या वित्तीय समस्या सीधे Jio के कामकाज पर असर डाल सकती है। लिस्टिंग के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वतंत्र शेयरधारकों के आने के बाद इन अंदरूनी निर्भरताओं को कैसे मैनेज किया जाता है।
