Jio के धमाकेदार मार्केट डेब्यू ने निवेशकों का भरोसा जीत लिया है, जिससे अब भारतीय बाजारों में नए IPOs की बहार आने की राह साफ हो गई है। 200 से ज्यादा कंपनियां कतार में हैं और साल 2027 तक भारत ग्लोबल कैपिटल के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बना रहेगा।
बाजार में नई ऊर्जा का संचार
Jio Platforms की ब्लॉकबस्टर लिस्टिंग ने भारतीय मार्केट की वैल्यूएशन की परिभाषा बदल दी है। कंपनी ने ₹30,200 करोड़ जुटाए और पहले ही दिन शेयर में 27% का जोरदार उछाल देखने को मिला। इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल घरेलू बल्कि विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित किया है। अब Tata Sons और Reliance Retail Ventures जैसी दिग्गज कंपनियां भी अपनी लिस्टिंग की योजनाओं को तेज करने पर विचार कर रही हैं।
नियमों में बदलाव का असर
इस तेजी के पीछे रेगुलेटरी बदलावों का बड़ा हाथ है। कंपनियों को लिस्टिंग के समय केवल 2.5% इक्विटी डाइल्यूट करने की छूट ने सप्लाई के दबाव को कम कर दिया है। यह नया मॉडल अन्य कंपनियों के लिए भी एक ब्लूप्रिंट बन गया है। फिलहाल 113 कंपनियां रेगुलेटरी क्लीयरेंस ले चुकी हैं, जबकि 115 कंपनियां अभी डॉक्यूमेंटेशन के दौर में हैं, जो मार्केट में बनी हलचल को लंबे समय तक जारी रखेगा।
आगे कौन सी कंपनियां हैं लिस्टिंग की रेस में?
बाजार अब PhonePe, Pernod Ricard India और Flipkart जैसे बड़े नामों के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। इस साल अब तक $18.26 बिलियन जुटाए जा चुके हैं, और यह आंकड़ा जल्द ही $22.36 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकता है। Red Lions Capital जैसी बड़ी इन्वेस्टमेंट फर्मों की दिलचस्पी और रिटेल निवेशकों की भागीदारी से भारतीय इक्विटी स्पेस में लिक्विडिटी का स्तर 2027 तक मजबूत बने रहने के पूरे आसार हैं।
