शुक्रवार को 6 मेनबोर्ड IPO का समापन हुआ, जिसमें कुल इश्यू साइज **₹4,510 करोड़** के मुकाबले निवेशकों ने **₹1.4 लाख करोड़** से अधिक की भारी-भरकम बोली लगाई। यह साल 1996 जैसा दुर्लभ मंजर है, जहां संस्थागत निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी दिखी है।
शुक्रवार का दिन भारतीय प्राइमरी मार्केट के इतिहास में दर्ज हो गया है। एक ही दिन में 6 मेनबोर्ड IPO का बंद होना इस बात का प्रमाण है कि मार्केट में लिक्विडिटी की कोई कमी नहीं है। भले ही कुल इश्यू साइज ₹4,510 करोड़ था, लेकिन निवेशकों की ओर से आए ₹1.4 लाख करोड़ के बिड्स ने बाजार को चौंका दिया है।
QIBs का रहा दबदबा
इस तूफानी तेजी के पीछे मुख्य हाथ 'क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स' (QIBs) का रहा है। उनकी आक्रामक बिडिंग ने सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों को नई ऊंचाई दी। इसमें Rentomojo और Karamtara Engineering सबसे आगे रहे, जिन्हें क्रमशः 72.88 गुना और 62.63 गुना सब्सक्राइब किया गया।
कर्ज मुक्ति पर कंपनियों का जोर
निवेशकों की दिलचस्पी का एक बड़ा कारण कंपनियों की बिजनेस स्ट्रैटेजी भी है। Rentomojo और Karamtara Engineering दोनों ने साफ किया है कि वे IPO से जुटाए गए फंड का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च करेंगी, जिससे उनके फाइनेंशियल हेल्थ में सुधार होगा। हालांकि, हर जगह उत्साह एक जैसा नहीं था; Manipal Payment and Identity Solutions का इश्यू सिर्फ 1.42 गुना ही भर पाया, जो दिखाता है कि निवेशक अब काफी सेलेक्टिव हो गए हैं।
जोखिम और सतर्कता
इतनी भारी डिमांड के बाद अब वैल्युएशन पर सवाल उठने लगे हैं। लिस्टिंग के बाद इन स्टॉक्स में वोलेटिलिटी (Volatility) दिखने की पूरी संभावना है क्योंकि सब्सक्रिप्शन के दबाव में रिटेल निवेशकों की उम्मीदें काफी बढ़ जाती हैं। साथ ही, प्राइमरी मार्केट में ब्लॉक हुए इस भारी-भरकम कैपिटल का असर सेकेंडरी मार्केट की लिक्विडिटी पर भी पड़ सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि ये कंपनियां अपने लिस्टिंग के बाद भविष्य के ग्रोथ प्लान्स और मुनाफे को कैसे बरकरार रखती हैं।
