IPO मार्केट में तूफानी तेजी: अगस्त में जुटाए **₹21,000 करोड़**, क्या अब जोखिम में हैं रिटेल निवेशक?

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AuthorAditya Rao|Published at:
IPO मार्केट में तूफानी तेजी: अगस्त में जुटाए **₹21,000 करोड़**, क्या अब जोखिम में हैं रिटेल निवेशक?

अगस्त के महीने में भारतीय प्राइमरी मार्केट में **20** से ज्यादा IPO लॉन्च हुए हैं, जिन्होंने कुल **₹21,000 करोड़** जुटाए हैं। **30 सितंबर** की रेगुलेटरी डेडलाइन के चलते मची इस होड़ ने मार्केट में लिक्विडिटी (Liquidity) को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे रिटेल निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी।

भारतीय शेयर बाजार इस समय पूंजी प्रवाह (Capital flow) में एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। रेगुलेटरी डेडलाइन के दबाव में कंपनियों की ओर से पब्लिक ऑफर लाने की मची होड़ के चलते केवल अगस्त 2026 में ही 21 से 23 कंपनियों ने अपने IPO लॉन्च किए हैं। यह सब SEBI की तरफ से IPO अप्रूवल के लिए दी गई एक विशेष समय-सीमा के कारण हो रहा है, जो 30 सितंबर 2026 को खत्म होने वाली है। बाजार का अनुमान है कि सितंबर भी इसी तरह की हलचल वाला रहने वाला है।

लिक्विडिटी का रस्साकशी (Liquidity Tug-of-War)

इस IPO फ्रेंजी का सबसे बड़ा असर सेकेंडरी मार्केट की लिक्विडिटी पर पड़ रहा है। जो फंड आमतौर पर दिग्गज और एस्टेब्लिश कंपनियों (Blue-chip stocks) में निवेश किया जाता था, वह अब नए लिस्ट होने वाले शेयरों की तरफ शिफ्ट हो रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो रहा है क्योंकि निवेशक लिस्टिंग-डे गेन्स (Listing-day gains) के लालच में सब्सक्राइब करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सट्टा आधारित प्राइसिंग का खतरा

लिस्टिंग के दिन का मुनाफा आकर्षक जरूर हो सकता है, लेकिन मौजूदा माहौल में सस्टेनेबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं। जब निवेशक केवल सब्सक्रिप्शन रेट्स पर ध्यान देते हैं, तो कंपनी के फंडामेंटल्स (Fundamentals) पीछे छूट जाते हैं। प्रमोटर्स इसी का फायदा उठाकर आक्रामक वैल्यूएशन मांग रहे हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसी 'इरैशनल एक्ज़ुबरेंस' (Irrational exuberance) अक्सर उन लिस्टिंग्स में बदल जाती है जहां ट्रेडिंग सेटल होने के बाद शेयर गिरते हैं। अगर लिस्टिंग के बाद कंपनी कमाई का प्रदर्शन नहीं करती, तो ऊंची कीमतों पर खरीदारी करने वाले रिटेल निवेशकों का पैसा फंस सकता है।

आगे क्या होगा?

आने वाले समय में Jio Platforms और National Stock Exchange (NSE) जैसे बड़े IPOs की दस्तक से पूंजी के लिए मारामारी और बढ़ सकती है। यह देखना अहम होगा कि क्या बाजार बिना सेकेंडरी मार्केट को नुकसान पहुंचाए इतनी बड़ी सप्लाई को पचा पाता है। निवेशकों के लिए अब सबसे जरूरी है कि वे पोस्ट-लिस्टिंग परफॉरमेंस पर नजर रखें और कंपनी का चुनाव करते समय अधिक सिलेक्टिव बनें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.