भारतीय शेयर बाजार में प्राइमरी मार्केट का जोर बना हुआ है। अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक, मेनबोर्ड IPO का पाइपलाइन ₹3.86 लाख करोड़ के स्तर तक पहुंच गया है, जिसमें 130 कंपनियों को SEBI की मंजूरी मिल चुकी है।
बाजार में रिकॉर्ड IPO की बहार
डोमेस्टिक प्राइमरी मार्केट में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस साल अब तक 84 कंपनियों ने कुल ₹1.10 लाख करोड़ जुटाए हैं, लेकिन आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। मौजूदा पाइपलाइन के हिसाब से कंपनियां अपने विस्तार और ग्रोथ प्लान के लिए भारी पूंजी जुटाने की तैयारी में हैं।
क्या है गणित?
मार्केट में सप्लाई का स्तर काफी ऊंचा है। आंकड़ों को दो हिस्सों में देखा जा सकता है:
- मंजूरी मिल चुकी: 130 कंपनियों को SEBI से हरी झंडी मिल चुकी है, जो बाजार से ₹2.43 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य रख रही हैं।
- DRHP फाइलिंग: इसके अलावा 75 और कंपनियां अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) जमा कर चुकी हैं, जो करीब ₹1.44 लाख करोड़ की मांग कर सकती हैं। यह डेटा 'Association of Investment Bankers of India' द्वारा जारी किया गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इतनी बड़ी संख्या में IPO आने का मतलब है कि बाजार की लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ेगा। जब एक साथ कई इश्यू आते हैं, तो यह मौजूदा लिस्टेड शेयरों से पैसा खींच सकते हैं। हालांकि, संस्थागत खरीदारों (QIBs) का रिस्पॉन्स अभी तक मजबूत रहा है, जिसमें 49 गुना तक ओवरसब्सक्रिप्शन देखा गया है, जबकि रिटेल निवेशकों ने 26 गुना और HNI ने 86 गुना तक सब्सक्रिप्शन दिखाया है।
लेकिन निवेशकों को सलाह है कि वे केवल भीड़ को देखकर निवेश न करें। हर कंपनी के बिजनेस मॉडल और वैल्युएशन (Valuation) को गहराई से समझें, क्योंकि गलत प्राइसिंग वाले IPO लिस्टिंग के बाद सेकेंडरी मार्केट में गिरावट का शिकार हो सकते हैं। सितंबर 2026 तक देश में मर्चेंट बैंकर्स की संख्या भी बढ़कर 250 हो गई है, जो इस पूरे सिस्टम को अधिक संगठित बनाता है, लेकिन अनुशासन अब भी सबसे जरूरी है।
