Indian Startups IPO: AI के दम पर तेज हुई रफ्तार, मार्केट में आने की मची होड़

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Startups IPO: AI के दम पर तेज हुई रफ्तार, मार्केट में आने की मची होड़

भारतीय स्टार्टअप्स अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से पब्लिक मार्केट का रुख कर रहे हैं। AI की मदद से रेवेन्यू टारगेट जल्दी हासिल करने के कारण **150** से ज्यादा कंपनियों ने लिस्टिंग की मंजूरी ले ली है, जिनसे **$24 बिलियन** तक की कमाई का अनुमान है।

भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पब्लिक मार्केट में उतरने का समय तेजी से घट रहा है। जो कंपनियां पहले एक दशक में लिस्ट होने का सपना देखती थीं, वे अब आधुनिक स्केलिंग और वेंचर कैपिटल सपोर्ट के चलते चंद महीनों में ही बड़े माइलस्टोन हासिल कर रही हैं।

AI का बड़ा रोल

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। सॉफ्टवेयर, फाइनेंस और मार्केटिंग में AI के इस्तेमाल से कंपनियां अपनी लागत घटा रही हैं और प्रॉफिटेबिलिटी के लेवल तक तेजी से पहुंच रही हैं। यह सिर्फ काम करने का तरीका नहीं, बल्कि कंपनी की रेवेन्यू क्वालिटी बढ़ाने का आधार बन गया है।

पाइपलाइन और निवेशकों की चिंता

मार्केट का मूड देखें तो साल 2021 से 2026 के बीच 300 से ज्यादा नई लिस्टिंग हो चुकी हैं। SEBI के पास अभी 150 से ज्यादा कंपनियां लिस्टिंग के लिए तैयार खड़ी हैं। हालांकि, तेज ग्रोथ के साथ एक बड़ा रिस्क भी जुड़ा है—क्या यह रफ्तार पब्लिक मार्केट की स्क्रूटनी और तिमाही नतीजों के दबाव में भी बरकरार रहेगी?

लिस्टिंग के अलावा भी रास्ते

IPO ही एकमात्र रास्ता नहीं है। साल 2020 से 'सेकेंडरी ट्रांजेक्शंस' (Secondary Transactions) एक बड़े एग्जिट रूट के तौर पर उभरे हैं, जो कुल वेंचर कैपिटल एग्जिट वैल्यू का करीब 25% है। साल 2030 तक स्टार्टअप सेक्टर के $1 ट्रिलियन वैल्यूएशन तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन असली परीक्षा वही कंपनियां पास करेंगी जो तेजी के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल हेल्थ को बैलेंस कर पाएंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.