Indian Startups IPO: लेट-स्टेज फंडिंग को छोड़ जल्दी IPO ला रहे स्टार्टअप्स, क्या है बड़ा बदलाव?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Startups IPO: लेट-स्टेज फंडिंग को छोड़ जल्दी IPO ला रहे स्टार्टअप्स, क्या है बड़ा बदलाव?

Meesho के CEO विदित आत्रेय ने संकेत दिया है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब लेट-स्टेज प्राइवेट फंडिंग के बजाय जल्दी पब्लिक होने (IPO) पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, निवेशकों का मिजाज अब बदल गया है और वे 'ग्रोथ' के बजाय 'प्रॉफिटेबिलिटी' को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि हालिया लिस्टिंग में से आधे से ज्यादा शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं।

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां फाउंडर्स अब पारंपरिक प्राइवेट फंडिंग के बजाय जल्दी पब्लिक मार्केट का रुख कर रहे हैं। ET Startup Awards 2026 में बोलते हुए, Meesho के CEO विदित आत्रेय ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट की परिपक्वता (Maturity) इस बदलाव का मुख्य कारण है। अमेरिका जैसे बाजारों के विपरीत, भारत में अब छोटे और नए स्टार्टअप्स के लिए भी पब्लिक लिस्टिंग के रास्ते खुले हैं।

क्यों बदल रही है रणनीति?

यह बदलाव पिछले दशक के 'कैपिटल-इंटेंसिव' दौर से अलग है। पब्लिक मार्केट में जल्दी आने से कंपनियों को एक व्यापक निवेशक आधार मिलता है। लेकिन यह राह आसान नहीं है। एक पब्लिक कंपनी बनने का मतलब है—बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, फाइनेंशियल अनुशासन और पूर्ण पारदर्शिता।

निवेशकों की नई प्राथमिकता

Groww के CEO ललित केशरे ने चेतावनी दी है कि पब्लिक लिस्टिंग केवल एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि जवाबदेही (Accountability) की निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को अब 'ग्रोथ-एट-एनी-कॉस्ट' के माइंडसेट को छोड़कर प्रॉफिटेबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देना होगा।

सितंबर 2026 में रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत में 34 मेनबोर्ड IPO आए, जिन्होंने कुल ₹39,340 करोड़ जुटाए। हालांकि, बाजार का रुख अब काफी सिलेक्टिव हो गया है। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच आए 58% IPO अपने ऑफर प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

रेगुलेटरी बदलावों, जैसे कि प्री-IPO प्लेसमेंट में म्यूचुअल फंड्स की भागीदारी पर लगी रोक ने भी स्टार्टअप्स के लिए चुनौतियों को बढ़ाया है। अब कंपनियों को निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए सिर्फ ग्रोथ की कहानियाँ नहीं, बल्कि ठोस कैश फ्लो और पारदर्शी वित्तीय प्रदर्शन दिखाना होगा, वरना वैल्यूएशन में भारी गिरावट का खतरा बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.