2021 के IPO बूम के पांच साल बाद अब नई तकनीक वाली भारतीय कंपनियां मुनाफे पर जोर दे रही हैं। निवेशकों का भरोसा अब केवल रेवेन्यू ग्रोथ पर नहीं, बल्कि ठोस ऑपरेटिंग मुनाफे पर टिका है।
वैल्युएशन का बड़ा अंतर
इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ी चिंता नई टेक कंपनियों और पुरानी मैन्युफैक्चरिंग दिग्गज कंपनियों के बीच का वैल्युएशन गैप है। इन नई टेक कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹6.25 लाख करोड़ के पार है, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2026 में इनका सामूहिक नेट प्रॉफिट महज ₹2,400 करोड़ रहा है। इसका मतलब है कि निवेशक मुनाफे के हर ₹1 के लिए ₹260 चुका रहे हैं। इसकी तुलना में, Larsen & Toubro जैसी कंपनियां मुनाफे के हर ₹1 पर महज ₹28 पर ट्रेड कर रही हैं।
मुनाफे की असलियत क्या है?
कंपनियों के नेट प्रॉफिट को देखें तो उसमें 'अदर इनकम' (Other Income) का बड़ा हाथ है, जो कोर बिजनेस से नहीं आता। उदाहरण के तौर पर, Zomato ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹366 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, लेकिन इसमें ₹1,396 करोड़ तो 'अदर इनकम' के थे। EBITDA मार्जिन अभी भी महज 2.2 फीसदी है, जो ऑपरेटिंग मजबूती पर सवाल खड़े करता है।
किसका प्रदर्शन बेहतर, किसका खराब?
बाजार की चाल अलग-अलग रही है। Zomato, Nazara Technologies और RateGain Travel Technologies ने बेहतर प्रदर्शन किया है और Nifty 50 TRI को पछाड़ा है। वहीं, One97 Communications (Paytm) और CE Info Systems को भारी चुनौतियों और रेगुलेटरी बाधाओं का सामना करना पड़ा है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है।
अब निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
रेवेन्यू ग्रोथ का दौर अब खत्म हो चुका है। कंपनियों की लंबी अवधि की वैल्यू अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने कोर बिजनेस से कितना कैश पैदा कर पाती हैं। अब निवेशकों को यह बारीकी से ट्रैक करना होगा कि प्रॉफिट का कितना हिस्सा रियल बिजनेस से आ रहा है और कितना निवेश या अन्य वित्तीय लाभों से।
