भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए 9 सितंबर का दिन ऐतिहासिक होने वाला है। एक साथ 6 कंपनियां अपना IPO लेकर आ रही हैं। इसकी मुख्य वजह SEBI की वह डेडलाइन है, जिसके खत्म होने से पहले कंपनियां लिस्टिंग की रेस में भाग रही हैं।
बाजार में क्यों मचा है IPO का शोर?
9 सितंबर, 2026 को भारतीय प्राइमरी मार्केट में हलचल अपने चरम पर होगी, जब 6 बड़े IPO एक साथ खुलेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 7 सितंबर से 11 सितंबर के बीच आने वाले 11 IPOs की उस बड़ी लहर का हिस्सा है, जिसके जरिए कंपनियां बाजार से कुल ₹7,055 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं।
इस दौड़ में Rentomojo (₹1,255.57 करोड़) और Manipal Payment & Identity Solutions (₹805 करोड़) जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
SEBI की डेडलाइन और निवेशकों के लिए चुनौती
इस अचानक आई तेजी के पीछे का असली कारण रेगुलेटर SEBI द्वारा दी गई 30 सितंबर, 2026 की डेडलाइन है। जिन कंपनियों को मंजूरी तो मिल चुकी थी, लेकिन किसी कारणवश वे लॉन्च में देरी कर रही थीं, अब उनके पास अप्रूवल एक्सपायर होने से पहले लिस्ट होने का आखिरी मौका है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
एक साथ इतनी सारी कंपनियों के बाजार में आने से सप्लाई बढ़ गई है। ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आंख बंद करके पैसा न लगाएं।
- सिलेक्टिव रहें: अब निवेशक सिर्फ उन्हीं कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है।
- रिस्क फैक्टर: जैसे Manipal Payment की बात करें, तो कंपनी की कमाई कुछ ही क्लाइंट्स पर निर्भर है, जो रिस्की हो सकता है।
- क्या देखें?: अगले हफ्ते निवेशकों को सब्सक्रिप्शन डेटा, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) और कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
इतनी भारी सप्लाई के बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या मार्केट में उतनी लिक्विडिटी है जो इन सभी इश्यूज को अच्छी लिस्टिंग गेन दिला सके?
