IPO बाजार में क्यों आई नरमी?
फरवरी में 17 कंपनियों ने अपने IPO लॉन्च किए, जिनसे कुल ₹4,650 करोड़ की ही फंड जुटाया जा सका। यह आंकड़ा फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए फंड जुटाने वाले महीनों में दूसरा सबसे कम है, जो प्राइमरी मार्केट में घटी हुई एक्टिविटी की ओर इशारा करता है।
बाजार में चिंता और ग्लोबल संकेतों का असर
IPO की यह धीमी रफ्तार निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है। सेकेंडरी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव, अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी से ट्रेड पर असर की चिंता और कंपनियों के मुनाफे (Earnings) पर दबाव जैसे कई फैक्टर्स इसके पीछे थे। रुपए का कमजोर होना भी मार्केट अनिश्चितता बढ़ा रहा था। यह ट्रेंड ग्लोबल मार्केट में भी देखा गया, जहां फरवरी में पब्लिक इश्यू एक्टिविटी में कमी आई। हालांकि, इस सबके बावजूद भारत इस महीने IPO इश्यू की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर रहा।
विदेशी निवेशकों (FPIs) की जोरदार वापसी
जहां प्राइमरी मार्केट शांत था, वहीं दूसरी ओर फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने एक बड़ी वापसी की। तीन महीनों के आउटफ्लो के बाद, वे फरवरी में नेट बायर्स बने और उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का भारी निवेश किया। यह पिछले 17 महीनों में उनका सबसे बड़ा इनफ्लो रहा। SEBI के मुताबिक, इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह भारत और अमेरिका के बीच हुई एक अंतरिम ट्रेड डील थी, जिसने एक्सपोर्ट टैरिफ को काफी कम कर दिया। इसके अलावा, तीसरी तिमाही में कंपनियों के मजबूत मुनाफे और ग्रोथ पर फोकस वाले यूनियन बजट ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और विदेशी कैपिटल को आकर्षित किया।
IPO लिस्टिंग का कैसा रहा परफॉरमेंस?
जो कंपनियां फरवरी में स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुईं, उनका शुरुआती प्रदर्शन मिला-जुला रहा। 17 IPOs में से 10 ने अपने पहले ट्रेडिंग दिन पर इश्यू प्राइस से ऊपर या बराबर क्लोजिंग दी। यह बताता है कि नए लिस्टिंग के लिए बाजार तो था, लेकिन बहुत ज्यादा उत्साह नहीं था।