साल 2026 के पहले हाफ में भारतीय कंपनियों ने बाज़ार में गिरावट के बावजूद 27 IPOs के ज़रिए ₹22,572 करोड़ की जोरदार रकम जुटाई है। खास बात ये है कि विदेशी निवेशकों ने प्राइमरी मार्केट में पैसा लगाया, जबकि सेकेंडरी मार्केट से पैसा निकाला।
प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में दिखा अलग नज़ारा
साल 2026 के पहले छमाही में भारतीय प्राइमरी मार्केट ने ज़बरदस्त मजबूती दिखाई। सेकेंडरी मार्केट में MSCI India Index 13% तक गिर गया, लेकिन इसके बावजूद 27 कंपनियों ने IPOs के ज़रिए कुल ₹22,572 करोड़ की बड़ी रकम हासिल की।
विदेशी निवेशकों का बदला मूड
निवेशकों के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां एक ओर फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने सेकेंडरी मार्केट से ₹3.06 लाख करोड़ से ज़्यादा की निकासी की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्राइमरी मार्केट के नए इश्यूज में लगभग ₹21,630 करोड़ का निवेश किया। यह दिखाता है कि निवेशक अब कंपनियों के ग्रोथ के नज़रिया को देखकर पैसा लगा रहे हैं, बजाय इसके कि वो नतीजों में मंदी और ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में सेकेंडरी मार्केट में सीधे निवेश करें।
नए IPOs का प्रदर्शन: मिली-जुली तस्वीर
हालांकि, सभी नए लिस्ट हुए स्टॉक्स का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। 6 जुलाई तक लिस्ट हुए 27 IPOs पर लिस्टिंग वाले दिन औसतन 1.3% का मामूली रिटर्न मिला, लेकिन प्रदर्शन काफी मिला-जुला रहा। Omnitech Engineering के शेयर 124.43% तक बढ़े, और Sedemac Mechatronics के शेयर 111.68% चढ़ गए। OnEMI Technology Solutions, Shadowfax Technologies, और Bharat Coking Coal जैसे स्टॉक्स ने भी निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया।
इसके विपरीत, IPOs में निवेश के जोखिम भी सामने आए। कई कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से काफी नीचे चले गए। Shree Ram Twistex में 61.65% की गिरावट आई, Innovision में 43.93% की गिरावट देखी गई, और Amir Chand Jagdish Kumar (Exports) के शेयर 23.80% गिरे। हाल ही में लिस्ट हुए CSM Technologies और Turtlemint Fintech Solutions के शेयरों में भी गिरावट का दबाव रहा, जो दिखाता है कि सिर्फ मार्केट ट्रेंड पर भरोसा करने के बजाय हर कंपनी के फंडामेंटल्स का मूल्यांकन करना ज़रूरी है।
भविष्य की योजनाएं और रेगुलेटरी स्थिति
प्राइमरी मार्केट की यह रफ्तार 2026 के बाकी हिस्से में भी जारी रहने की उम्मीद है। Prime Database के अनुसार, आने वाले इश्यूज की एक बड़ी पाइपलाइन तैयार है। फिलहाल, 157 कंपनियों को SEBI से ₹2.38 लाख करोड़ जुटाने की मंज़ूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, 77 कंपनियां रेगुलेटरी क्लीयरेंस का इंतज़ार कर रही हैं, जिससे कुल संभावित इश्यू पाइपलाइन लगभग ₹4 लाख करोड़ तक पहुंच जाती है। निवेशक स्वास्थ्य सेवा, कंज्यूमर टेक्नोलॉजी, वित्तीय सेवाएं और विनिर्माण जैसे सेक्टरों में इन IPOs के लॉन्च होने के समय पर नज़र रखेंगे, क्योंकि इन भविष्य के इश्यूज की सफलता निवेशक की भूख और मार्केट की स्थिरता पर निर्भर करेगी।
