साल **2026** के पहले **10** महीनों में भारतीय कंपनियों ने **109** IPOs के जरिए **₹1.58 लाख करोड़** की भारी रकम जुटाई है। अब **252** और कंपनियां कतार में हैं, जो कुल **₹4.5 लाख करोड़** जुटाने की तैयारी में हैं, जिससे बाजार में लिक्विडिटी का दबाव बढ़ सकता है।
प्राइमरी मार्केट में जबरदस्त तेजी
साल 2026 की शुरुआत सुस्त रही थी, जिसमें पहली तिमाही में केवल ₹3,794 करोड़ ही जुट पाए थे। लेकिन इसके बाद मार्केट ने रफ्तार पकड़ी और अक्टूबर के अंत तक कुल 109 IPOs के जरिए ₹1.58 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। सिर्फ अक्टूबर महीने में ही कंपनियों ने ₹44,450 करोड़ जुटाए, जिसमें Jio Platforms की बड़ी भूमिका रही।
निवेशकों की कमाई और लिस्टिंग गेन्स
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और रिटेल निवेशकों के मजबूत समर्थन से प्राइमरी मार्केट चमक रहा है। मौजूदा साइकिल में आए 64 IPOs में निवेशकों को औसतन 19% का लिस्टिंग गेन मिला है। वहीं, ESDS Software Solution, Tempsens Instruments और SS Retail जैसे स्टॉक्स ने तो 80% से 109% तक का बंपर रिटर्न दिया है।
आगे का रिस्क और चुनौती
फिलहाल 252 कंपनियां लाइन में हैं जो ₹4.5 लाख करोड़ बाजार से उठाना चाहती हैं। इसमें 122 कंपनियों के पास SEBI की मंजूरी है (₹2.2 लाख करोड़), जबकि 130 कंपनियों ने अभी ड्राफ्ट पेपर जमा किए हैं (₹2.35 लाख करोड़)।
इतनी बड़ी मात्रा में कंपनियों के आने से बाजार में लिक्विडिटी पर दबाव बन सकता है। अगर लिस्टिंग की रफ्तार बहुत तेज रही, तो सब्सक्रिप्शन लेवल और लिस्टिंग गेन्स कम होने का खतरा है। इसके अलावा, SEBI की मंजूरी की एक्सपायरी होने से भी कुछ कंपनियों के प्लान में देरी हो सकती है। आने वाले समय में मार्केट का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां अपने इश्यू की प्राइसिंग कितनी आकर्षक रखती हैं और बाजार इस बड़ी सप्लाई को कैसे सोखता है।
