Indian IPO: घरेलू निवेशकों की 'दबंगई', अब कंपनियां मनमानी कीमतों पर नहीं ला सकेंगी IPO

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian IPO: घरेलू निवेशकों की 'दबंगई', अब कंपनियां मनमानी कीमतों पर नहीं ला सकेंगी IPO

भारतीय IPO मार्केट में अब पासा पलट गया है। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) अब महंगी कीमतों को लेकर सख्त हो गए हैं। इसका असर यह है कि IPO का मीडियम प्राइस-टू-बुक रेशियो **10.2** से गिरकर **7.4** पर आ गया है, जिससे कंपनियों को अपने ऑफर डाउनसाइज करने पड़ रहे हैं।

वैल्यूएशन में आई बड़ी गिरावट

अब वह दौर नहीं रहा जब प्रमोटर्स मनमानी वैल्यूएशन मांग लेते थे। साल 2026 में घरेलू म्यूच्यूअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों की हिस्सेदारी IPO में बढ़कर 33% हो गई है, जो 2021 में सिर्फ 24% थी। इस बढ़ती ताकत का नतीजा यह हुआ है कि ₹10 अरब से ज्यादा वाले बड़े IPOs का मीडियन प्राइस-टू-बुक रेशियो 7.4 गुना तक आ गया है, जो पिछले साल 10.2 गुना था। अब निवेशक 'FOMO' के बजाय फंडामेंटल्स और मार्जिन ऑफ सेफ्टी पर ध्यान दे रहे हैं।

बड़े नाम बैकफुट पर

मार्केट की इस सख्ती का असर बड़े दिग्गजों पर भी दिखा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपने इश्यू साइज में करीब 15% की कटौती करनी पड़ी, क्योंकि निवेशकों ने शुरुआती वैल्यूएशन को बहुत महंगा माना था। वहीं, Prestige Estates की सब्सिडियरी, Prestige Hospitality Ventures ने तो अपना IPO ही वापस ले लिया और अब वे Canada Pension Plan Investment Board से प्राइवेट फंडिंग की राह देख रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

बाजार में अब अनुशासन बढ़ रहा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अत्यधिक वैल्यूएशन पर आए पुराने IPOs अभी भी अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जिससे नए निवेशकों में डर का माहौल है। अब कंपनियों को सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि मजबूत फाइनेंशियल रिजल्ट्स दिखाने होंगे, अन्यथा उन्हें सब्स्क्रिप्शन न मिलने या डील कैंसिल होने का बड़ा जोखिम उठाना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.