भारतीय IPO मार्केट में इस साल अब तक **$5.78 बिलियन** का फंड जुटाया गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के **$7.32 बिलियन** से कम है। डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स (Domestic Investors) के अधिक सलेक्टिव होने के कारण कंपनियां अब डील के साइज़ (Deal Size) को छोटा कर रही हैं और वैल्यूएशन (Valuation) की उम्मीदें भी कम कर रही हैं। छोटी IPOs में देरी हो रही है, लेकिन साल के अंत में कुछ बड़ी कंपनियों के IPOs पाइपलाइन में हैं।
IPO मार्केट में आई नरमी
भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में नरमी का दौर देखा जा रहा है। इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (IPOs) के जरिए जुटाए गए कुल फंड में 2025 की समान अवधि की तुलना में लगभग 21% की गिरावट आई है। लगातार दो साल रिकॉर्ड-ब्रेकिंग एक्टिविटी के बाद, जहां 2024 में $20.65 बिलियन और 2025 में $22.36 बिलियन का फंड जुटाया गया था, मौजूदा माहौल ने कई कंपनियों को अपनी फाइनेंशियल स्ट्रेटेजी (Financial Strategy) पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है।
डील साइज़ और टाइमलाइन पर असर
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियां निवेशकों की बढ़ती सावधानी के प्रति अधिक सजग हो रही हैं। कई बड़ी फर्मों ने अपनी पेशकश को छोटा करने का फैसला किया है। Temasek द्वारा समर्थित Manipal Health Enterprises Ltd. ने अपने लक्ष्य को घटाकर $960 मिलियन कर दिया, जबकि Juniper Green Energy ने अपनी प्रस्तावित इश्यू साइज़ को $314 मिलियन से घटाकर $188 मिलियन कर दिया। एक अन्य मामले में, Indo-MIM Ltd. ने $396 मिलियन सफलतापूर्वक जुटाए, जो कि $700 मिलियन के अपने मूल लक्ष्य से काफी कम था, भले ही इसे अच्छी सब्सक्रिप्शन मिली हो।
अन्य कंपनियों ने अपनी स्ट्रेटेजी को पूरी तरह से रोकने या बदलने का विकल्प चुना है। Zepto Ltd. हाल ही में अपने पिछले पीक $7 बिलियन के वैल्यूएशन फीडबैक से कम मिलने के बाद प्री-IPO प्लेसमेंट (Pre-IPO Placement) की ओर बढ़ी। वहीं, Sify Infinit Spaces Ltd. जैसी फर्मों ने अपनी योजनाओं को होल्ड पर रखा है, और Walmart Inc. द्वारा समर्थित PhonePe Ltd. ने अपनी पब्लिक लिस्टिंग (Public Listing) को स्थगित करने का फैसला किया है।
निवेशकों की बदलती भूमिका
इस ट्रेंड का मुख्य कारण डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Domestic Institutional Investors) का बढ़ता दबदबा है, जो अब प्राइसिंग नेगोशिएशन (Pricing Negotiation) में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विदेशी निवेशकों की भागीदारी कम रहने के कारण, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशंस अधिक आकर्षक वैल्यूएशन की मांग कर रहे हैं, जिससे कई इश्यूअर्स आक्रामक फंड जुटाने के लक्ष्यों पर सफल डील एग्जीक्यूशन (Deal Execution) को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्केट की अस्थिरता और सेकेंडरी मार्केट में हालिया IPOs के मिले-जुले प्रदर्शन के संयोजन ने पार्टिसिपेंट्स को काफी ज्यादा सलेक्टिव बना दिया है।
लार्ज-कैप IPOs पर फोकस
छोटे डील साइज़ और देरी के व्यापक ट्रेंड के बावजूद, मार्केट अभी भी बड़ी लिस्टिंग का इंतजार कर रहा है। जुलाई 2026 तक Jio Platforms Ltd. और National Stock Exchange of India Ltd. दोनों ने अपने ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (Draft Prospectuses) फाइल कर दिए हैं। प्रत्येक से $1 बिलियन से अधिक का डील होने की उम्मीद है। यदि मार्केट की स्थितियां स्थिर रहती हैं, तो इन IPOs के सितंबर या अक्टूबर में लॉन्च होने की उम्मीद है। निवेशक इन बड़ी पेशकशों की प्रतिक्रिया पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये साल के बाकी समय में व्यापक मार्केट की भूख का बैरोमीटर साबित हो सकते हैं।
