भारतीय कंपनियों ने चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (H1 FY27) में रिकॉर्ड **₹2.43 ट्रिलियन** जुटाए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले **75%** अधिक है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह तेजी तब आई है जब Nifty 50 इंडेक्स महज **1.3%** की सुस्त चाल पर अटका हुआ है।
भारतीय कंपनियों के लिए फंड जुटाने का यह दौर ऐतिहासिक रहा है। पहली छमाही में जुटाए गए ₹2.43 ट्रिलियन (लगभग $25.27 बिलियन) यह दिखाते हैं कि कंपनियां भारी मात्रा में पूंजी खींच रही हैं, जबकि सेकेंडरी मार्केट में रौनक कम है।
क्यों है यह अंतर?
एक तरफ जहां कंपनियों के IPO और अन्य फंड जुटाने के कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहे हैं, वहीं Nifty 50 इंडेक्स में इस दौरान केवल 1.3% की बढ़त देखी गई है। यह अंतर साफ करता है कि प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट अलग-अलग दिशाओं में काम कर रहे हैं।
इस तेजी की असली वजह
- पेंडिंग पाइपलाइन: मार्केट की पुरानी अस्थिरता के कारण जिन कंपनियों ने अपनी योजनाएं टाली थीं, वे अब वापस आ गई हैं।
- रेगुलेटरी सपोर्ट: रेगुलेटर्स ने IPO अप्रूवल्स को एक्सटेंशन दिया, जिससे मोमेंटम बना रहा।
- घरेलू लिक्विडिटी: रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की जबरदस्त बाइंग इस पूरी रैली का इंजन बनी है, जबकि विदेशी निवेशक (FIIs) ग्लोबल ब्याज दरों और क्रूड ऑयल की कीमतों के कारण सतर्क बने हुए हैं।
मुख्य बोर्ड IPOs ने इस बार ₹942.05 बिलियन जुटाए, जो पिछले रिकॉर्ड से 35% ज्यादा है। इसमें LIC के स्टेक सेल का ₹314 बिलियन का बड़ा योगदान रहा।
निवेशकों के लिए 'सप्लाई ओवरहैंग' का खतरा
बाजार एक्सपर्ट्स अब 'सप्लाई ओवरहैंग' (Supply Overhang) को लेकर चिंता जता रहे हैं। अगर लगातार नए शेयर बाजार में आते रहे और घरेलू निवेशकों की खरीदारी की रफ्तार धीमी हुई, तो सेकेंडरी मार्केट इन्हें एब्जॉर्ब नहीं कर पाएगा। आने वाले समय में Jio Platforms और Oyo जैसे बड़े नाम भी कतार में हैं। अगर लिक्विडिटी कम हुई, तो मौजूदा वैल्यूएशन्स पर दबाव आना तय है।
