India IPO Market: ग्लोबल हब बनने की ओर भारत, Peak XV की AI सेक्टर पर बड़ी भविष्यवाणी

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AuthorAditya Rao|Published at:
India IPO Market: ग्लोबल हब बनने की ओर भारत, Peak XV की AI सेक्टर पर बड़ी भविष्यवाणी

Peak XV Partners के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन आनंदन के मुताबिक, भारत स्टार्टअप लिस्टिंग के मामले में दुनिया का लीडिंग मार्केट बनने जा रहा है। फर्म का लक्ष्य **2030** तक **25-30** AI यूनिकॉर्न तैयार करना है, हालांकि निवेशकों को R&D फंडिंग और प्रॉफिटेबिलिटी जैसे चुनौतियों पर नजर रखनी होगी।

बाजार में नए युग की दस्तक

$9 अरब से ज्यादा फंड मैनेज करने वाली वेंचर कैपिटल फर्म Peak XV Partners ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर जबरदस्त भरोसा जताया है। फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन आनंदन ने बताया कि भारत अब दुनिया के सबसे सक्रिय स्टार्टअप IPO बाजारों में से एक बन रहा है। इस फर्म का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है और अब तक ये 38 कंपनियों को मार्केट में लिस्ट करा चुके हैं, जिसमें 2025 में महज 5 हफ्तों के भीतर 5 पोर्टफोलियो कंपनियों की लिस्टिंग शामिल है।

डीप-टेक और AI पर फोकस

अब निवेश का ट्रेंड बदल रहा है। पहले जहां कंज्यूमर-सेंट्रिक बिजनेस का बोलबाला था, वहीं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे डीप-टेक सेक्टर पर फोकस शिफ्ट हो गया है। Peak XV का 'Surge' प्रोग्राम, जिसने सितंबर 2026 में अपना इन्वेस्टमेंट सीलिंग बढ़ाकर $5 मिलियन कर दिया है, इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। आनंदन का मानना है कि इस रणनीति से 2030 तक भारत में 25 से 30 AI-आधारित यूनिकॉर्न सामने आएंगे, जो कम लागत और बेहतर तकनीक पर आधारित होंगे।

R&D फंडिंग का पेंच

ग्रोथ की संभावनाओं के बीच R&D फंडिंग एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत फिलहाल अपनी GDP का महज 0.65% हिस्सा R&D पर खर्च करता है, जो अमेरिका (3.5%) और चीन (2.5%) जैसे देशों की तुलना में काफी कम है। ग्लोबल कॉम्पिटिशन में टिकने के लिए इस खर्च को $100 अरब तक ले जाने की जरूरत है। हालांकि, सरकार का ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड इस खाई को भरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सीट-स्टेज इनोवेशन को प्रॉफिटेबल पब्लिक कंपनी बनाने का सफर अभी भी काफी चुनौतीपूर्ण है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

भविष्य में आने वाले IPOs की सफलता सिर्फ उनकी संख्या पर निर्भर नहीं करेगी। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी है कि क्या ये डीप-टेक कंपनियां लिस्टिंग से पहले कंसिस्टेंट प्रॉफिट और सस्टेनेबल वैल्युएशन दिखा पाती हैं या नहीं। कंप्यूट पावर और रिसर्च कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता ही लंबे समय में शेयरधारकों के लिए वैल्यू तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.