बाज़ार में क्यों दिखी इतनी मजबूती?
भारतीय शेयर बाज़ारों में जारी मजबूती के पीछे देश की मजबूत इकोनॉमिक नींव और कंपनियों के दमदार तिमाही नतीजों का हाथ है। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाज़ार अपनी राह बना रहा है। पिछले हफ्ते के अंत में, निफ्टी 50 इंडेक्स करीब 22.3 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा था, जबकि सेंसेक्स 22.7 पर। ये वैल्यूएशन ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर हैं, जो भविष्य की ग्रोथ को दर्शाते हैं। वहीं, S&P 500 का P/E लगभग 29.2 और डाउ जोंस का 23.6 है। इस सबके बावजूद, बाज़ार में करीब 1.5% की गिरावट के बाद भी रिकवर करने की क्षमता, डोमेस्टिक इकोनॉमी और खासकर Q3 में आए शानदार नतीजों पर निवेशकों के भरोसे को दिखाती है। निफ्टी 50 इंडेक्स का मार्केट कैप लगभग ₹2,02,93,674 करोड़ और सेंसेक्स का ₹1,63,83,326 करोड़ है। शुक्रवार को निफ्टी 25,632.55 पर बंद हुआ, जिसका डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम करीब 20.6 करोड़ शेयर रहा।
IPO का सैलाब और ग्लोबल टेंशन का साया
प्राइमरी मार्केट में भी हलचल तेज है। अगले कुछ दिनों में तीन बड़े IPOs खुलने वाले हैं। Clean Max Enviro Energy Solutions ₹3,100 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रख रहा है, जिसका प्राइस बैंड ₹1,000-₹1,053 है। हालांकि, विश्लेषकों ने इसके 16x EV/EBITDA के वैल्यूएशन पर कुछ चिंता जताई है। कॉटन यार्न बनाने वाली कंपनी Shree Ram Twistex ₹110.24 करोड़ जुटाना चाहती है, जिसका प्राइस रेंज ₹95-₹104 है। PNGS Reva Diamond Jewellery ₹380 करोड़ के लिए ₹367-₹386 के प्राइस बैंड पर IPO ला रही है। IPOs की यह भीड़ ऐसे समय आई है जब ग्लोबल लेवल पर भू-राजनीतिक तनाव, खासकर US-ईरान के बीच चल रहा गतिरोध, बाज़ार पर छाया हुआ है। डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना और US CPI डेटा ने उभरते बाज़ारों पर दबाव बढ़ा दिया है। पिछले एक साल में निफ्टी 50 ने 11.5% का CAGR दिया है, जो बाज़ार की रिकवरी क्षमता को दर्शाता है, पर बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम छोटी अवधि में गिरावट ला सकते हैं।
बाज़ार की अंदरूनी चुनौतियां
भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ की कहानी के बावजूद, कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। बाज़ार के ऊंचे P/E रेश्यो, भले ही मजबूत अर्निंग्स के कारण सही ठहराए जा सकें, पर वे ऐतिहासिक औसत से ऊपर हैं। IPOs की भारी कतार भी मार्केट लिक्विडिटी को डायवर्ट कर सकती है और लिस्टिंग पर असर डाल सकती है। विदेशी मुद्रा भंडार, जो हालिया आंकड़ों के अनुसार $717.06 बिलियन था, उसमें भी कुछ बड़े बदलाव दिखे हैं। वहीं, पिछले हफ्ते गोल्ड रिजर्व में $14 बिलियन से ज्यादा की गिरावट देखी गई। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली, खासकर ग्लोबल रिस्क एवर्जन के कारण, इक्विटी वैल्यूएशन और रुपये पर दबाव डाल सकती है।
आगे क्या? इन पर रहेगी नज़र
आने वाले हफ्तों में मार्केट पार्टिसिपेंट्स कुछ अहम इकोनॉमिक डेटा पर बारीकी से नज़र रखेंगे। इसमें बुधवार को यूरो एरिया इन्फ्लेशन, गुरुवार को US इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स और शुक्रवार/शनिवार को भारत के Q4 GDP, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के आंकड़े शामिल हैं। US-ईरान तनाव का कोई भी समाधान बाज़ार के लिए बड़ी राहत बन सकता है। हालांकि, लगातार भू-राजनीतिक摩擦 या उम्मीद से ज्यादा इन्फ्लेशन वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ा सकता है। Geojit Investments के डॉ. वी. के. विजयकुमार का मानना है कि बाज़ार की कमजोरी का फायदा उठाकर अच्छी क्वालिटी वाले स्टॉक्स खरीदे जा सकते हैं, लेकिन IPOs की भीड़ और ऊंचे वैल्यूएशन ट्रेडिंग के लिए एक जटिल माहौल बना रहे हैं।