IPO शेयरों का सैलाब, मार्केट पर दबाव की आशंका
भारतीय शेयर बाजार एक बड़ी चुनौती के लिए तैयार है। 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 के बीच, 95 कंपनियों के लगभग $68 अरब के शेयर लॉक-अप अवधि (lock-up period) खत्म होने के बाद बाजार में आ जाएंगे। यह भारी सप्लाई ऐसे समय में आ रही है जब निवेशक पहले से ही सतर्क हैं और बाजार का सेंटीमेंट (sentiment) कमजोर है। मार्च 2026 की शुरुआत तक, Sensex और Nifty जैसे प्रमुख इंडेक्स पहली तिमाही में अच्छी-खासी गिरावट झेल चुके थे। जियो-पॉलिटिकल तनाव (geopolitical tensions), बढ़ती तेल की कीमतें, कमजोर पड़ता रुपया और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया हुआ है। ऐसे माहौल में, यह उम्मीद से ज्यादा शेयरों का बाजार में आना, मार्केट को और कमजोर कर सकता है।
कुछ प्रमुख IPOs से बड़े शेयर अनलॉक
अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान, शेयरों की एक साथ बड़ी मात्रा में बाज़ार में आने की योजना है। उदाहरण के लिए, 13 अप्रैल को Tata Capital अपने 67% इक्विटी (equity) जारी करेगा। मई में Lenskart Solutions (60%) और Pine Labs (80%) के बड़े शेयर अनलॉक होंगे। जून में Meesho अपने 68% शेयर जारी करेगा। यह शेयरों का सैलाब ऐसे समय में आ रहा है जब हालिया IPOs का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, तीन में से लगभग दो IPOs अपने इश्यू प्राइस (issue price) से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। लिस्टिंग पर औसत बढ़ोतरी (average gain) घटकर सिर्फ 8% रह गई है, और 27 मार्च 2026 तक, IPOs का कुल औसत रिटर्न -7% नेगेटिव हो गया था। यह दिखाता है कि नई लिस्टिंग को लेकर निवेशकों का उत्साह काफी कम हो गया है।
हाई Valuations का होगा टेस्ट
इन लॉक-अप एक्सपायरी (lock-up expiry) की भारी मात्रा और एकाग्रता (concentration) कई नई लिस्टेड कंपनियों के valuation को खतरे में डाल सकती है। Lenskart Solutions, उदाहरण के लिए, लगभग 260-294x के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। Pine Labs का P/E मल्टीपल 148x से 677x से भी ज्यादा है। ये valuation मौजूदा मार्केट कंडीशन के हिसाब से बहुत ज्यादा लगते हैं, जहां निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर है और कई कंपनियों के शेयर गिर रहे हैं। तुलना के लिए, Nifty Financial Services इंडेक्स 21.69x के P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो अपने 7-साल के औसत से थोड़ा ऊपर है। Consumer Durables सेक्टर 57.62x के P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो अपने 7-साल के औसत से थोड़ा नीचे है। वहीं, Coal India का P/E लगभग 9.59x है, जो अपने इंडस्ट्री एवरेज से काफी कम है। Meesho, जो अभी तक प्रॉफिटेबल (profitable) नहीं है, पहले से ही नेगेटिव P/E पर ट्रेड कर रहा है। शेयरों की यह बाढ़ इन हाई मल्टीपल्स (high multiples) का री-असेसमेंट (re-assessment) करवा सकती है, जिससे उन कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आ सकती है जो अपने प्रदर्शन के आधार पर वर्तमान valuation को सही नहीं ठहरा सकतीं।
डिमांड में कमी और फंडामेंटल रिस्क
मुख्य जोखिम शेयर सप्लाई (supply) और निवेशक डिमांड (demand) के बीच असंतुलन (mismatch) से पैदा होता है। जिस तरह से फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) बिकवाली जारी रखे हुए हैं और डोमेस्टिक रिटेल निवेशकों की रुचि कम हो रही है, यह कहना मुश्किल है कि बाजार इतनी बड़ी मात्रा में नए शेयर को बिना बड़ी गिरावट के अवशोषित (absorb) कर पाएगा या नहीं। कई कंपनियां, जो IPOs के जरिए भारी फंड जुटा चुकी हैं, लेकिन उनमें कमाई (earnings) के हिसाब से वैसी ग्रोथ नहीं दिखी है, अब दबाव में आ सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि IPO मार्केट में मौजूदा कमजोरी, हाई लिक्विडिटी (liquidity) और inflated valuations के दौर के बाद एक सामान्य साइक्लिकल करेक्शन (cyclical correction) है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में Sensex और Nifty के साल के अंत में गिरावट के साथ बंद होने का मतलब है कि निवेशकों की उम्मीदें कम हैं। कमजोर फाइनेंस, हाई डेट (debt) या अप्रूवन बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां बढ़ी हुई सप्लाई के दबाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। इससे सिर्फ एक अस्थायी गिरावट ही नहीं, बल्कि लगातार अंडरपरफॉर्मेंस (underperformance) देखने को मिल सकता है, क्योंकि शुरुआती निवेशक बेचेंगे और नई सप्लाई शेयरों की कीमतों को नीचे धकेल देगी।
आगे का रास्ता
हालांकि मार्केट लॉक-अप एक्सपायरी से काफी दबाव का सामना कर रहा है, कुछ विश्लेषक मानते हैं कि व्यापक मार्केट करेक्शन (market correction) पहले ही डिस्काउंट (discount) हो चुका होगा। उनका मानना है कि मैक्रोइकॉनोमिक (macroeconomic) कंडीशन सुधरने पर रिकवरी की संभावना है। हालांकि, तत्काल आउटलुक (outlook) सतर्क रहने का है। अगले चार महीनों में मार्केट में आने वाली शेयरों की भारी मात्रा कीमतों को तय करने में एक प्रमुख फैक्टर बनी रहेगी। निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल (fundamentals) और ग्रोथ पोटेंशियल (growth potential) वाली कंपनियों और उन कंपनियों के बीच अंतर करना होगा जिनके valuation केवल मार्केट के उत्साह पर आधारित हैं और जिन्हें बड़ी गिरावट का ज्यादा खतरा है। आने वाले कुछ महीने भारत की नई लिस्टेड कंपनियों के हेल्थ (health) और डिमांड के लिए एक महत्वपूर्ण टेस्ट साबित होंगे।