साल 2026 में भारतीय IPO मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। अक्टूबर तक **96** कंपनियों ने कुल **₹1.1 लाख करोड़** से अधिक जुटा लिए हैं, हालांकि ग्लोबल अनिश्चितता के बीच निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट फिलहाल तेजी के दौर से गुजर रहा है। अक्टूबर 2026 के मध्य तक 96 मेनबोर्ड IPO के जरिए कंपनियां ₹1.1 लाख करोड़ से ज्यादा जुटा चुकी हैं। बाजार में ग्रोथ कैपिटल की मांग बरकरार है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट की उठापटक ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सेक्टर का हाल और बड़े नाम
फिलहाल फाइनेंसियल सर्विसेज और इंडस्ट्रियल सेक्टर का बोलबाला है। आने वाले दिनों में मार्केट पर नजर डालें तो 237 कंपनियों ने ₹4.48 लाख करोड़ जुटाने की तैयारी कर रखी है। सबसे ज्यादा चर्चा Jio Platforms के IPO की है, जो अक्टूबर के अंत में आ सकता है और इससे कंपनी ₹36,000 करोड़ से ₹38,000 करोड़ तक फंड जुटा सकती है।
रिस्क और बाजार की चुनौती
प्राइमरी मार्केट के आंकड़े भले ही चमकदार हों, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में FPI (फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स) की बिकवाली से सेंटिमेंट बिगड़ा है। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों का असर विदेशी निवेश पर साफ दिख रहा है। इसके अलावा, कई IPO के शेयर लिस्टिंग के बाद इश्यू प्राइस से नीचे फिसल रहे हैं, जो कंपनियों की आक्रामक प्राइसिंग की ओर इशारा करता है। साथ ही, बहुत सी कंपनियां 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए पुराने शेयरधारकों को फायदा पहुंचा रही हैं, न कि बिजनेस विस्तार के लिए नया फंड जुटा रही हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि यह आईपीओ पाइपलाइन कितनी सस्टेनेबल रहती है। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स, OFS का हिस्सा और वैल्यूएशन पर बारीकी से गौर करना चाहिए। ग्लोबल और घरेलू मार्केट की अनिश्चितता के बीच, शेयर की लिस्टिंग के बाद बनी रहने वाली मजबूती ही भविष्य के IPO की रफ्तार तय करेगी।
