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India IPO News: प्रमोटरों की एग्जिट स्ट्रैटेजी बनी निवेशकों के लिए सिरदर्द, वैल्यूएशन गिरने से हुआ भारी नुकसान

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AuthorAditya Rao|Published at:
India IPO News: प्रमोटरों की एग्जिट स्ट्रैटेजी बनी निवेशकों के लिए सिरदर्द, वैल्यूएशन गिरने से हुआ भारी नुकसान
Overview

भारतीय IPO मार्केट में पिछले कुछ सालों की तेजी के बाद अब करेक्शन (Correction) देखने को मिल रहा है। 2021 से 2026 के बीच, कई कंपनियों में प्रमोटरों और प्राइवेट इक्विटी फर्मों ने शेयर बिक्री (Offer-for-Sale - OFS) के जरिए महंगे दामों पर अपनी हिस्सेदारी बेची, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

IPO में प्रमोटरों के एग्जिट से निवेशकों को झटका

हाल के वर्षों में भारतीय IPO बाजार में ताबड़तोड़ IPOs आए, लेकिन अब हकीकत सामने आ रही है। 2021 से 2026 के बीच लगभग 300 IPOs में OFS का हिस्सा था, जिनमें से 68 IPOs पूरी तरह से OFS थे। इन OFS के जरिए मौजूदा शेयरधारकों (Promoters and PE Firms) को सीधे ₹1.76 लाख करोड़ मिले। अप्रैल 2026 तक, इन 68 कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लिस्टिंग के समय के वैल्यूएशन से लगभग ₹95,000 करोड़ तक गिर चुका था। यह दिखाता है कि कई निवेशकों ने ऊंचे वैल्यूएशन पर खरीदारी की और अब वे अपनी लिस्टिंग वैल्यू से भी नीचे के भाव पर शेयर खरीद बैठे हैं।

ऊंचे वैल्यूएशन का खेल: P/E रेश्यो की हकीकत

इस दौर में OFS-भारी IPOs के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 57x तक पहुंच गए थे, जो Nifty 50 के उस समय के 20-30x के दायरे से काफी ज्यादा था। Vedant Fashions और C.E. Info Systems जैसी कंपनियों के IPO के समय P/E रेश्यो 100x से भी ऊपर थे। हालांकि, अब इनके P/E रेश्यो थोड़े कम हुए हैं, जैसे C.E. Info Systems का P/E अब 34.64 के करीब है, जबकि इंडस्ट्री का औसत 22.77 है। Kotak Institutional Equities के अनुसार, अब मार्केट मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को तरजीह दे रहा है, न कि सिर्फ हाई-ग्रोथ और लिक्विडिटी वाली कंपनियों को।

OFS-ओनली IPOs में निवेश का जोखिम

100% OFS वाले IPOs में पैसा कंपनी के विकास या कर्ज चुकाने में नहीं जाता, बल्कि सीधे बेचने वाले शेयरधारकों की जेब में चला जाता है। यह कंपनी में निवेश की बजाय मालिकाना हक का ट्रांसफर (Ownership Transfer) होता है। AGS Transact Technologies का नेगेटिव P/E रेश्यो (-0.18) इसका उदाहरण है, जहां कंपनी का मार्केट कैप बेचने वालों द्वारा जुटाए गए फंड से भी कम है। 2013 के बाद से IPO राशि का लगभग 68% OFS से आया है, जिससे प्रमोटरों के जल्दी एग्जिट करने की मंशा पर सवाल उठते हैं। 2023 में 30% तक रहने वाले एवरेज लिस्टिंग गेन (Listing Gains) 2025 के अंत तक नेगेटिव हो गए हैं, जो बाजार की बदलती सोच को दर्शाता है।

निवेशकों की बदलती पसंद: मजबूत फंडामेंटल की मांग

मार्केट करेक्शन के बाद अब निवेशक IPO वैल्यूएशन और स्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। फंड का इस्तेमाल कैसे होगा और कंपनी के बिजनेस के बेसिक्स कितने मजबूत हैं, ये सवाल अब पूछे जा रहे हैं। उम्मीद है कि भविष्य में IPOs में पैसे का सही इस्तेमाल, स्थिर कमाई और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों को प्राथमिकता मिलेगी।

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