Live News ›

India IPO Boom: रिकॉर्ड ₹1.79 लाख करोड़ जुडे, पर निवेशकों को लगा झटका!

IPO
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India IPO Boom: रिकॉर्ड ₹1.79 लाख करोड़ जुडे, पर निवेशकों को लगा झटका!
Overview

इस फाइनेंशियल ईयर (FY26) में इंडिया के मेनबोर्ड IPO मार्केट ने ₹1.79 लाख करोड़ के रिकॉर्ड फंड जुटाए हैं। यह पिछले साल के मुकाबले **10%** ज्यादा है और लगातार दूसरे साल IPO से सबसे ज्यादा पैसा जुटाया गया है। लेकिन, निवेशकों के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि IPO लिस्टिंग पर मिलने वाले फायदे (Listing Gains) कई सालों के निचले स्तर पर आ गए हैं और **108 में से 71 IPO** अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

रिकॉर्ड फंड जुटाना, पर प्रदर्शन फीका?

यह रिकॉर्ड फंड जुटाना IPO मार्केट के लिए तो अच्छा रहा, लेकिन नए लिस्ट हुए स्टॉक्स के प्रदर्शन पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ और ही है। कंपनियों ने रिकॉर्ड पैसा तो जुटा लिया, लेकिन निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक लिस्टिंग गेन्स नहीं मिले।

सबसे बड़े IPOs और कुल राशि

FY26 के सबसे बड़े IPOs की बात करें तो इनमें Tata Capital (₹15,512 करोड़), HDB Financial Services (₹12,500 करोड़) और LG Electronics India (₹11,605 करोड़) शामिल थे। इस तरह, कुल मिलाकर 112 मेनबोर्ड IPOs से ₹1.79 लाख करोड़ जुटाए गए, जो पिछले साल के ₹1.62 लाख करोड़ से 10% ज्यादा है। यह लगातार दूसरा साल है जब IPO से रिकॉर्ड फंड जुटाए गए हैं। हालांकि, डील वॉल्यूम और वैल्यू में इंडिया का IPO मार्केट ग्लोबल लीडर बनकर उभरा है, पर यह कामयाबी निवेशकों को लिस्टिंग के बाद नहीं मिली।

क्यों गिर रहे हैं निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न?

दरअसल, पिछले कुछ समय से चल रही ग्लोबल टेंशन (जैसे पश्चिम एशिया में युद्ध और अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता) और शेयर बाजार की अस्थिरता का असर साफ दिख रहा है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली के चलते भी मार्केट में कैश की कमी हुई। इसी का नतीजा है कि IPO लिस्टिंग पर मिलने वाला औसत फायदा (Listing Gains) सात साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो 8.88% के आसपास है। मार्च 2026 तक, 108 में से 71 IPOs तो अपने इश्यू प्राइस से भी नीचे ट्रेड कर रहे थे। FY26 का औसत रिटर्न मार्च अंत तक -7% के आसपास रहा।

रिटेल निवेशकों की घटती दिलचस्पी

इस गिरावट का असर रिटेल निवेशकों पर भी साफ दिख रहा है। FY26 में रिटेल एप्लीकेशन्स की औसत संख्या घटकर 12.87 लाख रह गई, जो पिछले साल 21.31 लाख थी। कुल मिलाकर, रिटेल ओवरसब्सक्रिप्शन भी घटकर 18 गुना रह गया, जबकि FY25 में यह 35 गुना था। साफ है, व्यक्तिगत निवेशक अब ज्यादा सावधान हो गए हैं।

हाई वैल्यूएशन और ओवरसप्लाई का असर

इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें IPOs की हाई वैल्यूएशन (High Valuations), हाल के सालों में IPO की ओवरसप्लाई (Oversupply) और आक्रामक प्राइसिंग शामिल है। कई कंपनियां उम्मीद से ज्यादा फंड जुटाने की कोशिश में अपने IPOs को महंगा बेच रही थीं। कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि SEBI के IPO प्राइसिंग और डिस्क्लोजर को लेकर कड़े नियमों का भी असर दिख रहा है, जिसकी वजह से कुछ कंपनियों ने अपने लिस्टिंग प्लान टाल दिए।

आगे क्या? क्वालिटी पर फोकस

आगे चलकर (FY27 में) IPO पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है। SEBI ने पहले ही 144 कंपनियों को करीब ₹1.75 लाख करोड़ जुटाने की मंजूरी दे दी है, और 63 कंपनियां अभी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में $20 बिलियन तक का फंड जुटाया जा सकता है। हालांकि, अब फोकस केवल IPO की संख्या पर नहीं, बल्कि 'क्वालिटी, स्केल और प्राइसिंग डिसिप्लिन' पर होगा। अच्छी मैनेजमेंट वाली, मुनाफा कमाने की स्पष्ट क्षमता रखने वाली और बढ़त वाले सेक्टर्स में लीडरशिप वाली कंपनियां ही निवेशकों का भरोसा जीत पाएंगी।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.