भारतीय प्राइमरी मार्केट में हलचल बढ़ने वाली है। चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में करीब 145 कंपनियां अपना IPO लाने की तैयारी में हैं, जिससे बाजार में **₹3.86 लाख करोड़** की भारी लिक्विडिटी आने की उम्मीद है।
भारतीय शेयर बाजार का प्राइमरी सेगमेंट एक बड़े दौर के लिए तैयार है। फिलहाल करीब 145 कंपनियों के पास SEBI की मंजूरी है, जो आने वाले महीनों में अपने IPO लॉन्च कर सकती हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आने वाला समय निवेशकों के लिए काफी एक्शन से भरपूर होने वाला है।
बड़े नाम और बाजार पर असर
इस IPO पाइपलाइन की सबसे बड़ी चर्चा Jio Platforms को लेकर है, जिसका इश्यू साइज लगभग ₹37,700 करोड़ रहने का अनुमान है। वहीं, Oravel Stays (OYO) भी ₹6,650 करोड़ के फ्रेश इश्यू के साथ कतार में है। पिछले साल सितंबर 2026 में National Stock Exchange (NSE) ने ₹22,562 करोड़ जुटाकर बाजार में उत्साह भरा था, अब उसी का अगला अध्याय देखने को मिलेगा।
निवेशकों के लिए सावधानी
जब इतने बड़े स्तर पर कंपनियां मार्केट में आती हैं, तो सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी का दबाव दिख सकता है। अक्सर बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स नए IPO में पैसा लगाने के लिए अपने मौजूदा पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करते हैं और स्टॉक्स बेचते हैं। इससे मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट के शेयरों पर दबाव बन सकता है।
वैल्यूएशन का गणित
अब बाजार का मिजाज बदल चुका है। निवेशक अब हर IPO पर आँख बंद करके पैसा नहीं लगा रहे हैं। वे कंपनी के बिजनेस मॉडल, सस्टेनेबल ग्रोथ और वैल्यूएशन को लेकर काफी चुनिंदा (selective) हो गए हैं। Nifty 50 के उतार-चढ़ाव के बीच, अगर कोई कंपनी महंगे वैल्यूएशन पर IPO लाती है, तो उसे रिस्पांस मिलने में मुश्किल हो सकती है। खासतौर पर कर्ज वाली कंपनियों के लिए, IPO की सफलता उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
