IPO Market Record: ₹3.86 लाख करोड़ की सुनामी! प्राइमरी मार्केट में IPO की भारी कतार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IPO Market Record: ₹3.86 लाख करोड़ की सुनामी! प्राइमरी मार्केट में IPO की भारी कतार

भारतीय शेयर बाजार में IPO का क्रेज नई ऊंचाई पर है। मेनबोर्ड IPO पाइपलाइन रिकॉर्ड **₹3.86 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गई है, जो इस साल अब तक जुटाई गई राशि का तीन गुना है।

भारतीय प्राइमरी मार्केट में इस समय लिस्टिंग के लिए कंपनियों की एक अभूतपूर्व होड़ लगी है। 'एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया' के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 तक IPO पाइपलाइन ₹3.86 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा इस साल अब तक 84 मेनबोर्ड IPO के जरिए जुटाई गई ₹1.10 लाख करोड़ की राशि से काफी ज्यादा है।

पाइपलाइन की हकीकत

इस कतार में 130 ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिन्हें SEBI से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 75 अन्य कंपनियां अभी भी क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं। यह बदलाव 2016 से जारी है, जब मेनबोर्ड लिस्टिंग के जरिए जुटाई गई राशि ₹26,494 करोड़ थी, जो 2025 में ही ₹1.76 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।

SME सेक्टर का विस्तार

सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) का बाजार भी तेजी से बड़ा हुआ है। 2026 में अब तक 156 SME इश्यू आ चुके हैं। खास बात यह है कि एक दशक पहले जहां SME IPO का औसत साइज ₹8 करोड़ हुआ करता था, वह अब बढ़कर ₹45 करोड़ हो गया है। साथ ही, रजिस्टर्ड मर्चेंट बैंकर्स की संख्या में 33% का उछाल आया है, जो अब 250 फर्मों तक पहुंच गई है।

निवेशकों का उत्साह और चुनौतियां

बाजार में लिक्विडिटी का स्तर निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। 2026 में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का औसत सब्सक्रिप्शन 49 गुना, रिटेल निवेशकों का 26 गुना और हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) का 86 गुना रहा है। हालांकि, इतनी बड़ी सप्लाई बाजार की लिक्विडिटी के लिए एक बड़ी परीक्षा हो सकती है। अब निवेशकों का ध्यान इस बात पर है कि कंपनियां अपने शेयरों की कीमत (Pricing Quality) किस तरह तय करती हैं और क्या यह डिमांड भविष्य में भी बनी रहती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.