साल 2026 की दूसरी छमाही में भारतीय प्राइमरी मार्केट ने रफ्तार पकड़ ली है। केवल अगस्त महीने में ही कंपनियों ने **₹21,000 करोड़** से ज्यादा जुटाए हैं।
साल 2026 की शुरुआत सुस्त रहने के बाद अब भारतीय IPO मार्केट में जोरदार वापसी देखने को मिल रही है। साल की पहली छमाही में करीब 60 कंपनियों ने ₹72,078 करोड़ जुटाए थे, लेकिन अगस्त का महीना इस मोमेंटम के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है।\n\n### एमएनसी की बदली रणनीति\n\nBofA Securities के मंदार डोंडे के अनुसार, अब बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां (MNCs) अपनी भारतीय सब्सिडियरीज को लिस्ट करने पर विचार कर रही हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय बाजार में मौजूद बेहतरीन वैल्यूएशन्स हैं। इन ग्लोबल फर्मों का मानना है कि प्राइवेट डील्स के मुकाबले पब्लिक मार्केट से उन्हें अपनी हिस्सेदारी का बेहतर दाम मिल सकता है।\n\n### डोमेस्टिक लिक्विडिटी का जादू\n\nबाजार की इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा हाथ भारतीय निवेशकों का है। म्यूचुअल फंड्स के SIP के जरिए आ रहे लगातार निवेश ने बाजार को विदेशी निवेशकों के उतार-चढ़ाव से बचाए रखा है। हालांकि, विदेशी निवेशक (FIIs) अभी भी काफी सतर्क हैं। वे भारत के IPO वैल्यूएशन की तुलना जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों से कर रहे हैं और ऊंचे प्राइस टैग को लेकर चिंतित हैं।\n\n### किन सेक्टरों पर रहेगी नजर?\n\nआने वाले समय में इंडस्ट्रियल्स, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी-मीडिया-टेलीकॉम सेक्टर पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसके अलावा, डेटा सेंटर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी हलचल देखी जा रही है। अब निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि ये बड़ी कंपनियां अपनी ऊंची वैल्यूएशन को किस तरह जस्टिफाई करती हैं और मार्केट का मूड आगे कैसा रहता है।
