संवत 2082 भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए ऐतिहासिक रहा, जहां मेनबोर्ड IPO के जरिए रिकॉर्ड **₹2.12 लाख करोड़** जुटाए गए। Jio Platforms और NSE के बड़े इश्यूज ने इस आंकड़े को नई ऊंचाई दी है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए संवत 2082 एक ऐतिहासिक साल बनकर उभरा है। इस पूरे साल के दौरान 129 कंपनियों ने पब्लिक मार्केट का रुख किया और कुल ₹2.12 लाख करोड़ की पूंजी जुटाई। यह आंकड़ा पिछले सभी सालों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
मेगा IPO की रही धूम
इस साल की सफलता के पीछे दो बड़े इश्यूज का हाथ रहा। Jio Platforms का IPO भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा इश्यू साबित हुआ, जिसने ₹30,213 करोड़ जुटाए। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी ₹22,561.57 करोड़ का सफल IPO पेश किया। इन दोनों कंपनियों ने मिलकर साल भर की कुल फंडरेजिंग का करीब 30% हिस्सा अकेले पूरा किया। बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो 89 कंपनियों ने अपने इश्यू प्राइस के बराबर या उससे ऊपर क्लोजिंग दी और लिस्टिंग डे पर औसतन 14.29% का रिटर्न दिया।
अब 'वैल्यूएशन' पर है निवेशकों की नजर
साल की शुरुआत में भले ही निवेशकों का रुझान लिस्टिंग गेन्स पर था, लेकिन साल के आखिरी महीनों में स्थिति बदल गई। अब निवेशक सिर्फ तेजी देखकर नहीं, बल्कि कंपनी के प्रॉफिट और कॉरपोरेट गवर्नेंस को देखकर पैसा लगा रहे हैं। जिन कंपनियों ने अपनी अर्निंग्स के मुकाबले बहुत महंगे दाम (aggressive pricing) मांगे, उन्हें लिस्टिंग के बाद कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है।
SME मार्केट की हलचल
संवत 2082 में SME सेगमेंट भी काफी सक्रिय रहा, जहां 238 कंपनियों ने ₹10,511 करोड़ जुटाए। हालांकि, एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि स्मॉल-कैप सेगमेंट में लिक्विडिटी कम होती है और यहां जोखिम अधिक रहता है।
आगे क्या है तैयारी?
IPO का पाइपलाइन अभी भी मजबूत बना हुआ है। नवंबर 2026 की शुरुआत तक 116 कंपनियों के पास SEBI की मंजूरी है, जो करीब ₹1.99 लाख करोड़ जुटा सकती हैं। साथ ही 122 फर्मों ने अपने ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स फाइल किए हैं। अब निवेशकों को ग्रे-मार्केट प्रीमियम के भरोसे रहने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल्स और मैनेजमेंट पर गहरी रिसर्च करने की जरूरत है।
