शेयर बाजार में जारी उठा-पटक के बावजूद भारतीय प्राइमरी मार्केट (IPO Market) में निवेश की बाढ़ आ गई है। साल 2026 में अब तक कुल **$13 बिलियन** जुटाए जा चुके हैं, जिसमें से **$9 बिलियन** सिर्फ तीसरी तिमाही में आए हैं।
प्राइमरी मार्केट का दम
Nifty 50 में इस साल लगभग 13% की गिरावट देखी गई है, लेकिन इसके बावजूद प्राइमरी मार्केट का उत्साह कम नहीं हुआ है। सिर्फ तीसरी तिमाही में ही कंपनियों ने $9 बिलियन से ज्यादा की रकम जुटाई है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी ताकत इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की मांग है, जिसने खराब सेकेंडरी मार्केट के माहौल में भी बड़े IPO को सफल बनाया है।
हाल ही में National Stock Exchange, SBI Funds Management और Manipal Health Enterprises के बड़े इश्यूज ने कुल $4.3 बिलियन से ज्यादा का फंड जुटाकर बाजार का भरोसा बरकरार रखा है।
आगे क्या है तैयारी?
भविष्य के लिए बाजार में एक भारी-भरकम पाइपलाइन तैयार है। करीब ₹3.86 लाख करोड़ के IPO कतार में हैं। SEBI से लगभग 130 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है और 75 कंपनियां अभी क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं। इन नामों में ₹10,000 करोड़ के इश्यू साइज के साथ Inox Clean Energy और Wadhwa Group Holdings जैसे बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। इसके अलावा Vardhman Appliances और Shreejikrupa Project ने भी अपने शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं।
निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी
रिकॉर्डतोड़ फंड जुटाने के बावजूद निवेशक अब पहले से ज्यादा सेलेक्टिव हो गए हैं। ग्लोबल इकोनॉमिक हेडविंड्स और विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के डर ने माहौल को सतर्क बना दिया है। कई कंपनियों को कमजोर मार्केट रिस्पॉन्स के डर से अपना इश्यू साइज घटाना पड़ रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कितनी जल्दी ये कंपनियां रेगुलेटरी मंजूरी से लॉन्च तक का सफर तय करती हैं, क्योंकि फाइलिंग्स का बड़ा बैकलाग देरी का कारण बन सकता है।
