India IPO Market: रिकॉर्ड IPO, पर निवेशकों को घाटा! 2026 में क्यों डूबी IPO की नैया?

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AuthorMehul Desai|Published at:
India IPO Market: रिकॉर्ड IPO, पर निवेशकों को घाटा! 2026 में क्यों डूबी IPO की नैया?
Overview

ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और निवेशकों के डर के चलते साल **2026** में इंडिया का प्राइमरी मार्केट (Primary Market) मुश्किलों में है। इस साल अब तक **19** मेनबोर्ड IPOs के जरिए **₹19,000 करोड़** जुटाए गए हैं, लेकिन लिस्टिंग पर औसतन **-1.3%** का घाटा हुआ है।

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वैल्यूएशन्स पर बढ़ रही निवेशकों की नजर

साल 2026 में इंडिया का प्राइमरी मार्केट एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। एक तरफ IPOs की भारी संख्या है, लेकिन निवेशकों को मुनाफा नहीं हो रहा। इस साल अब तक 19 मेनबोर्ड IPOs ने मिलकर करीब ₹19,000 करोड़ जुटाए हैं। हालांकि, बाजार में उनकी लिस्टिंग उम्मीद से कहीं कमजोर रही है, जिससे औसतन लिस्टिंग गेन -1.3% पर आ गया है। यह पिछले सालों के मुकाबले काफी कम है, जहां 2025 में औसतन 10% का गेन था, वहीं 2024 और 2023 में यह 30% और 28.7% था। अगर सरकारी कंपनी Bharat Coking Coal Ltd (BCCL) के शानदार 77% के लिस्टिंग प्रीमियम को छोड़ दें, तो यह औसत घाटा और बढ़कर -5.7% हो जाता है। BSE IPO Index में भी इस साल अब तक सिर्फ 2.4% का रिटर्न देखा गया है, जो कि BSE Sensex (लगभग 7% नेगेटिव) और Nifty 50 (लगभग 8% नेगेटिव) के प्रदर्शन को दर्शाता है।

ग्लोबल उथल-पुथल का IPO पर असर

निवेशकों का भरोसा ग्लोबल भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण कमजोर हुआ है। साल की शुरुआत में अमेरिकी टैरिफ की चिंताएं और फरवरी के अंत में अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष ने बाजार में काफी अस्थिरता पैदा की। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, Brent क्रूड 10-13% बढ़कर करीब $80-82 प्रति बैरल पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित रुकावटों ने एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इससे जेट फ्यूल, डीजल और फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ी हैं, और 2026 में ग्लोबल खाद्य कीमतों में करीब 6% की बढ़ोतरी का अनुमान है। उभरते बाजारों (Emerging Markets) में भारत भी इस वैश्विक अस्थिरता के बीच करेंसी दबाव और सख्त वित्तीय स्थितियों का सामना कर रहा है। मार्च 2026 को, BSE Sensex में 1,143 अंकों की भारी गिरावट देखी गई।

भारतीय IPOs को मुश्किल डेब्यू

इस चुनौतीपूर्ण माहौल में, कई भारतीय IPOs को बाजार में टिकने में मुश्किल हो रही है। BCCL (जो 77% प्रीमियम पर लिस्ट हुई) और Omnitech Engineering (जिसने डिस्काउंटेड डेब्यू के बाद लगभग 50% का गेन दिखाया) जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर, ज्यादातर IPOs का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। कॉटन यार्न निर्माता Shree Ram Twistex, लिस्टिंग पर 29.4% के डिस्काउंट के बाद अपने इश्यू प्राइस से 50% से ज्यादा गिर गई है, जो सबसे बड़ी पिछड़ने वाली कंपनी रही। Diversified services firm Innovision के शेयर लिस्टिंग के बाद लगभग 39% गिरे हैं। Clean Max Enviro Energy Solutions के शेयर अपने डेब्यू पर 18% लुढ़क गए, जो हाल के वर्षों में इस आकार के IPOs के सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक है। इसके ऑफर को पूरी तरह से सब्सक्राइब नहीं किया गया था, और रिटेल हिस्सेदारी में उम्मीद से काफी कम मांग देखी गई। AI पर फोकस करने वाली Fractal Analytics भी 2.7% के डिस्काउंट पर लिस्ट हुई, यह दर्शाता है कि बाजार प्रीमियम वैल्यूएशन देने में हिचकिचा रहा है। GSP Crop Science और Sai Parenteral जैसी कंपनियों ने 2-4% के मामूली लिस्टिंग प्रीमियम हासिल किए, लेकिन व्यापक बाजार की कमजोरी के कारण यह शुरुआती बढ़त भी खत्म हो गई।

नए लिस्टिंग्स के लिए जोखिम

मौजूदा IPO माहौल में नए लिस्टिंग के लिए कई बड़े जोखिम सामने आए हैं। IPOs की हाई वॉल्यूम और आर्थिक अस्थिरता के कारण कमजोर निवेशक भावना ने सप्लाई का दबाव बढ़ा दिया है। Shree Ram Twistex और Clean Max Enviro Energy Solutions जैसी कंपनियों ने दिखाया है कि कैसे मजबूत सब्सक्रिप्शन के बावजूद उन्हें भारी डिस्काउंट झेलना पड़ा। Amir Chand Jagdish Kumar (Exports) का 2.07x का हाई डेट-टू-इक्विटी रेशियो, जो साथियों के 0.4x-0.9x के मुकाबले काफी ज्यादा है, बढ़ती ब्याज दरों वाले माहौल में वित्तीय कमजोरियों को उजागर करता है। Fractal Analytics जैसी टेक-एनेबल्ड कंपनियों के लिए वैल्यूएशन चिंता का विषय बने हुए हैं। FY25 की कमाई पर इसका पोस्ट-लिस्टिंग P/E रेशियो 65.6x है, जो बाजार के औसत P/E ~22.35 से काफी ऊपर है, जिसके लिए लगातार उच्च ग्रोथ की जरूरत होगी। BCCL जैसे कुछ आउटलायर्स पर निर्भरता, ज्यादातर कंपनियों को प्रभावित करने वाली प्रणालीगत समस्याओं को छिपा रही है। Sedemac Mechatronics जैसी कंपनियों के लिए, जिन्होंने ऑफर फॉर सेल (OFS) किया, फ्रेश कैपिटल की कमी का मतलब है कि लिस्टिंग गेन सीधे परिचालन विस्तार में मदद नहीं करते। निवेशक अब ज्यादा चुनिंदा हो रहे हैं, जैसा कि Clean Max और Sai Parenteral के रिटेल हिस्सों के कम सब्सक्रिप्शन से पता चलता है। यह सट्टा लगाने वालों की बजाय फंडामेंटल वैल्यू और सिद्ध बिजनेस मॉडल पर फोकस करने की ओर एक बदलाव का संकेत है।

भविष्य का IPO मार्केट आउटलुक

विश्लेषकों का अनुमान है कि इंडिया के प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की सावधानी बनी रहेगी। मैक्रोइकॉनॉमिक परिदृश्य, जिसमें लगातार भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई का दबाव शामिल है, निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ाएगा। भविष्य के IPOs का प्रदर्शन मजबूत फंडामेंटल, स्पष्ट मुनाफा, वाजिब वैल्यूएशन और ग्रोथ की संभावना वाली कंपनियों पर निर्भर करेगा, न कि केवल सट्टा वाली थीम पर। व्यापक बाजार की भावना में सुधार और भू-राजनीतिक तनावों में कमी एक मजबूत IPO मार्केट के लिए महत्वपूर्ण होगी। तब तक, निवेशकों से क्वालिटी पर अधिक ध्यान देने की उम्मीद है।

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