India IPO Market: 2018 के बाद पहली तिमाही में दमदार प्रदर्शन, भू-राजनीतिक तनाव के बीच **$2.5 अरब** जुटाए

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AuthorAditya Rao|Published at:
India IPO Market: 2018 के बाद पहली तिमाही में दमदार प्रदर्शन, भू-राजनीतिक तनाव के बीच **$2.5 अरब** जुटाए
Overview

India IPO Market (इंडिया आईपीओ मार्केट) ने 2018 के बाद अपनी सबसे मजबूत पहली तिमाही (Q1) दर्ज की है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बाजार की अस्थिरता के बावजूद, इस तिमाही में **$2.5 अरब** (अरब डॉलर) जुटाए गए।

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वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के माहौल के बावजूद, India IPO Market (इंडिया आईपीओ मार्केट) ने 2018 के बाद से अपनी सबसे मजबूत पहली तिमाही (Q1) दर्ज की है। इस अवधि में कुल $2.5 अरब (अरब डॉलर) का फंड जुटाया गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 7.8% अधिक है। यह भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) की शानदार मजबूती को दर्शाता है।

यह प्रदर्शन तब हुआ जब दुनिया भर के शेयर बाजार मुश्किलों का सामना कर रहे थे। मार्च 2026 में Nifty 50 (निफ्टी 50) इंडेक्स में 11.36% की बड़ी गिरावट आई, खासकर अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ने के बाद, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया और महंगाई की चिंताएं बढ़ा दीं। वैश्विक स्तर पर, इक्विटी (Equity) में Q1 2026 में लगभग 3% की गिरावट देखी गई। हालांकि, भारतीय IPO सेक्टर ने इस रुझान के विपरीत प्रदर्शन किया और दुनिया भर में जुटाए गए कुल IPO Proceeds (आईपीओ प्रोसीड्स) का लगभग 8% हिस्सा हासिल किया। यह उभरते बाजारों (Emerging Markets) की इक्विटी के प्रदर्शन से कहीं बेहतर था, जिसमें सामूहिक रूप से 0.1% की मामूली गिरावट आई।

आगे की राह भी अच्छी दिख रही है। साल 2026 के बाकी हिस्से के लिए IPO पाइपलाइन (IPO Pipeline) काफी मजबूत है। लगभग 192 कंपनियां पब्लिक मार्केट (Public Market) में आने की तैयारी कर रही हैं, जिनका लक्ष्य सामूहिक रूप से करीब ₹2.5 लाख करोड़ जुटाना है। इनमें से 88 कंपनियों को नियामक से ₹1.16 लाख करोड़ जुटाने की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 104 कंपनियां अतिरिक्त ₹1.4 लाख करोड़ के लिए मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।

यह गतिविधि साल 2025 के रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन पर आधारित है, जब भारत के IPO मार्केट ने ₹1.78 लाख करोड़ जुटाए थे। विश्लेषकों को साल 2026 के दूसरे छमाही में एक महत्वपूर्ण उछाल की उम्मीद है, और कुल मिलाकर ₹4 लाख करोड़ के पूंजी निर्माण का अनुमान है। यह उम्मीद बेहतर ट्रेड डायनेमिक्स (Trade Dynamics) और सहायक राजकोषीय नीतियों से प्रेरित है।

हालांकि, कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। Nifty 50 वर्तमान में अपने लंबी अवधि के औसत प्राइस-टू-अर्निंग (Price-to-Earnings - P/E) अनुपात 21.2x के करीब कारोबार कर रहा है, जो कमाई में तेजी के बिना बड़े उछाल की सीमित गुंजाइश का संकेत देता है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बाजार की अस्थिरता को फिर से बढ़ा सकता है, जिससे निवेशकों की भावना प्रभावित हो सकती है। साल 2025 में, ऑफ-फॉर-सेल (Offer For Sale - OFS) कंपोनेंट्स (जिसमें मौजूदा शेयरधारक हिस्सेदारी बेचते हैं) ने IPO में दबदबा बनाया, जो जुटाए गए फंड का 63% से अधिक था। यह कंपनियों के विस्तार के लिए नई पूंजी के बजाय प्रमोटरों और प्राइवेट इक्विटी (Private Equity) फर्मों के लिए बाहर निकलने पर अधिक जोर दिखाता है। एक उल्लेखनीय बदलाव 'प्रॉफिटेबिलिटी प्रीमियम' (Profitability Premium) के रूप में भी देखा जा रहा है; साल 2025 में आए 55% स्टार्टअप IPO अपने इश्यू प्राइस (Issue Price) से नीचे कारोबार कर रहे थे, जो दर्शाता है कि पब्लिक मार्केट अब केवल विकास क्षमता के बजाय टिकाऊ कमाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद, विश्लेषकों को साल के शेष भाग के लिए भारत के पूंजी बाजारों के बारे में आशावादी बने हुए हैं। रणनीतिक विकास पहलों, पर्याप्त घरेलू लिक्विडिटी (Liquidity) और कॉर्पोरेट लाभप्रदता में सुधार का समर्थन इन उम्मीदों को बढ़ावा दे रहा है। अगर कंपनियां अपने वैल्यूएशन्स (Valuations) में अनुशासन बनाए रखती हैं और सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market) स्थिर रहता है, तो आने वाले वर्ष भारत के IPO मार्केट के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.