India IPO: शेयर बाजार भागा, पर IPO हुए ठंडे! जानिए क्या है वजह

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India IPO: शेयर बाजार भागा, पर IPO हुए ठंडे! जानिए क्या है वजह
Overview

अप्रैल **2026** में भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में सन्नाटा पसरा रहा। इस महीने सिर्फ एक ही इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लॉन्च हुई, जबकि BSE Sensex और NSE Nifty50 जैसे बड़े स्टॉक इंडेक्स (Stock Indices) में जोरदार उछाल देखा गया। यह विरोधाभास निवेशकों की गहरी सतर्कता को दर्शाता है, जो ग्लोबल तनावों और पिछले IPOs के खराब प्रदर्शन से प्रेरित है।

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भले ही शेयर बाजार में मजबूती दिखी हो, लेकिन भारत का प्राइमरी मार्केट (Primary Market) एक गहरी सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। अप्रैल 2026 इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (IPOs) के लिए हाल के दिनों में सबसे शांत महीनों में से एक रहा। यह बढ़ते सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market) और अटके हुए IPOs के बीच का अंतर दिखाता है, जो ग्लोबल चिंताओं और पिछले IPOs के प्रदर्शन के चलते निवेशकों और कंपनियों की सतर्कता को दर्शाता है।

बाजार की उछाल के बावजूद IPO की कमी

अप्रैल 2026 में, भू-राजनीतिक झटकों से उबरते हुए BSE Sensex में करीब 6.87% और NSE Nifty50 में 7.46% का उछाल आया। लेकिन, इस बाजार की मजबूती के बावजूद नए IPO लॉन्च की संख्या नहीं बढ़ी। Nifty50 24,000-24,600 के बीच स्थिर रहा, लेकिन अप्रैल के अपने हाई 24,601 से ऊपर बने रहने में संघर्ष कर रहा है। यह एक अजीब स्थिति पैदा करता है: जहां ब्रॉड इंडेक्स (Broad Indices) चढ़ रहे हैं, वहीं नए शेयर ऑफरिंग्स (Share Offerings) की मांग तेजी से गिरी है। Nifty और Sensex के वैल्यूएशन्स (Valuations) ऊंचे हैं, Nifty 50 का ट्रेलिंग P/E लगभग 26x और Sensex का 23x है। यह बाजार की उम्मीदों को दिखाता है, जो नए IPOs में देखी जा रही सतर्कता से बिल्कुल अलग है।

IPO की रफ्तार धीमी होने के कारण

प्राइमरी मार्केट में इस सन्नाटे के पीछे कई कारण हैं। इनमें पश्चिम एशिया में जारी ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें शामिल हैं। इन दबावों के चलते कई कंपनियों ने 'रुको और देखो' (Wait-and-Watch) की रणनीति अपनाई है, खासकर बड़े IPOs के लिए। एक बड़ा कारण हालिया IPOs का प्रदर्शन रहा है। पिछले साल के अधिकांश IPOs एक साल बाद अपने इश्यू प्राइस (Issue Price) से नीचे कारोबार कर रहे हैं, जिसने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है और नए ऑफरिंग्स की मांग को तेजी से कम कर दिया है। ऐतिहासिक रूप से, IPO बूम (IPO Boom) आमतौर पर सेकेंडरी मार्केट्स में लगातार रिकवरी और प्राइस डिस्कवरी (Price Discovery) के बाद आते हैं, खासकर स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के लिए। अभी, सेकेंडरी मार्केट की तेजी तब तक प्राइमरी एक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि Nifty के लिए 25,000 से 26,000 के ऊपर एक व्यापक, स्थायी तेजी (Bullish Trend) न दिखे।

जोखिम और कमजोरियां

इस मौजूदा मंदी के अपने जोखिम हैं। कंपनियों के लिए, IPO लॉन्च में देरी, जैसे कि PhonePe द्वारा कथित तौर पर स्थगित करना, पूंजी जुटाने और विकास को फंड करने के अवसरों को खोने का मतलब है। इससे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा मिल सकता है। निवेशक बहुत चुनिंदा, जोखिम-विरोधी रुख (Risk-Averse Stance) अपना रहे हैं, जो IPOs में कम भागीदारी से जाहिर होता है। यदि सेकेंडरी मार्केट की मजबूती ठोस नई कंपनियों के मजबूत पाइपलाइन से समर्थित नहीं है, तो यह सवाल उठता है कि व्यापक बाजार लाभ कितने समय तक टिकेगा। ऐतिहासिक रूप से, प्राइमरी मार्केट की एक्टिविटी कभी-कभी सेकेंडरी मार्केट से लिक्विडिटी (Liquidity) खत्म कर सकती है, जो तेजी से हालात बदलने पर एक मुद्दा बन सकता है। हाल के भारतीय IPOs के लिए औसत P/E 30s से 40s के ऊपरी सिरे पर रहा है। यह उन लिस्टिंग्स के वास्तविक प्रदर्शन से मेल नहीं खाता, जो संभावित मिसप्राइसिंग (Mispricing) या कंपनियों की अपेक्षाओं और निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा के बीच अंतर का संकेत देता है। यह कमजोरी तब तक बनी रह सकती है जब तक बाजार का सेंटिमेंट (Market Sentiment) स्पष्ट रूप से न बदले।

नए IPOs का भविष्य

विशेषज्ञों का अनुमान है कि स्टॉक मार्केट इंडेक्स में एक स्पष्ट, स्थिर ऊपर की ओर रुझान (Upward Trend) दिखने तक IPO एक्टिविटी शांत बनी रहेगी। स्मॉल और मिड-कैप शेयरों के वैल्यूएशन्स, खासकर हालिया गिरावट के बाद, कुछ निवेशकों को वापस खींच सकते हैं। हालांकि, प्रमुख इंडेक्स में एक स्थायी तेजी, जो Nifty के 25,000-26,000 स्तर से आगे बढ़े, IPO पाइपलाइन (IPO Pipeline) के गंभीर रूप से पुनर्जीवित होने के लिए आवश्यक मानी जाती है। जब तक यह निरंतर अपट्रेंड (Uptrend) नहीं आता, तब तक सतर्क भावना बनी रहेगी, जिसका मतलब है नए IPOs के लिए एक धीमा दौर।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.