Indian Capital Markets: फंड जुटाने के मामले में बनेगा इतिहास, FY27 में **₹6.5 लाख करोड़** का लक्ष्य

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Capital Markets: फंड जुटाने के मामले में बनेगा इतिहास, FY27 में **₹6.5 लाख करोड़** का लक्ष्य

भारतीय शेयर बाजार में फंड जुटाने की रफ्तार ऐतिहासिक स्तर पर है। FY27 में कंपनियां कुल **₹6.5 लाख करोड़** जुटाने की राह पर हैं, जिसमें IPO, QIP और ब्लॉक डील्स की बड़ी भूमिका है।

भारतीय कैपिटल मार्केट में इस समय जबरदस्त हलचल है। केवल कुछ बड़े इवेंट्स के बजाय, इस बार फंड जुटाने की प्रक्रिया में IPO, QIP और ब्लॉक डील्स का एक संतुलित मिश्रण दिख रहा है। जुलाई 2026 में तो बाजार ने ₹1.92 लाख करोड़ जुटाकर एक नया मासिक रिकॉर्ड ही कायम कर दिया, जो बाजार में मौजूद भारी लिक्विडिटी को दर्शाता है।

कंपनियों की बदली रणनीति

इस साल एक बड़ा बदलाव कंपनियों की 'प्रैगमैटिक प्राइसिंग' (Pragmatic Pricing) में देखने को मिला है। पहले कंपनियां निवेशकों को लुभाने के लिए भारी डिस्काउंट देती थीं, जिससे लिस्टिंग के बाद शेयर में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता था। अब कंपनियां बेहतर वैल्युएशन पर जोर दे रही हैं, जिसे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का भरपूर समर्थन मिल रहा है। साल 2026 के पहले सात महीनों में कुल ₹3.04 लाख करोड़ जुटाए जा चुके हैं, जिसमें से 58% हिस्सा प्रिफरेंशियल इश्यू यानी गैर-IPO रूट से आया है।

विदेशी निवेश और चुनौतियां

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का भरोसा भी लौटा है, जिन्होंने केवल जुलाई में भारतीय इक्विटी में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया है। हालांकि, बाजार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। US-Iran तनाव जैसे वैश्विक घटनाक्रम और देश में 4.45% की फूड इंफ्लेशन पर निवेशकों की नजर है। अगर RBI भविष्य में रेपो रेट बढ़ाता है, तो कंपनियों के लिए फंड जुटाना महंगा हो सकता है।

इसके अलावा, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन की बाधाओं के कारण कई सेक्टरों के प्रॉफिट मार्जिन में 1-1.5% तक की गिरावट देखी गई है। फिलहाल 145 से ज्यादा ड्राफ्ट फाइलिंग्स पाइपलाइन में हैं, लेकिन बाजार की यह तेजी कितनी टिकाऊ होगी, यह कंपनियों की इन लागत चुनौतियों को संभालने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.