IPO के ज़रिए ₹1,250 करोड़ जुटाएगी InCred Holdings
InCred Holdings अब पब्लिक मार्केट में लिस्ट होने के करीब है। कंपनी ने भारत के मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपने ड्राफ्ट पेपर्स को अपडेट किया है। इस IPO के ज़रिए कंपनी ₹1,250 करोड़ का फ्रेश फंड जुटाएगी। इस फंड का सीधा फायदा सब्सिडियरी InCred Finance को मिलेगा, जिससे कंपनी की कैपिटल बेस मजबूत होगी, लोन देने का बिज़नेस और तेजी से बढ़ेगा और कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CRAR) सुधरेगा। इसके साथ ही, कंपनी में 9.90 करोड़ से ज्यादा शेयर ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के तहत बेचे जाएंगे, जिससे KKR जैसे मौजूदा निवेशक अपना कुछ हिस्सा बेचकर लिक्विडिटी हासिल कर सकेंगे। यह स्ट्रेटेजी कंपनी के विकास के लिए पूंजी जुटाने और निवेशकों को एग्जिट का मौका देने, दोनों को साधने की कोशिश है।
KKR सहित कई निवेशक बेचेंगे शेयर
OFS में KKR 4 करोड़ शेयर बेच सकती है। इनके अलावा, MNI Ventures और Mohandas Pai Family, Moore Strategic, V'Ocean Investments जैसे अन्य निवेशक भी मिलकर 9.90 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं। यह इस बात का संकेत है कि मौजूदा निवेशक कंपनी के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। InCred Holdings एक होल्डिंग कंपनी की तरह काम करती है, और इसका मुख्य बिज़नेस सब्सिडियरी InCred Finance से ही आता है, जो RBI के तहत रजिस्टर्ड एक डाइवर्सिफाइड NBFC है। कंपनी IPO से पहले एक प्री-IPO प्लेसमेंट राउंड पर भी विचार कर रही है, जिसके ज़रिए फ्रेश इश्यू साइज का 20% तक अतिरिक्त फंड जुटाया जा सकता है।
InCred Finance का बिज़नेस और लोन पोर्टफोलियो
2017 में Bhupinder Singh द्वारा स्थापित InCred Finance, रिटेल लेंडिंग पर फोकस करने वाली NBFC है। कंपनी पर्सनल लोन, स्टूडेंट लोन, सिक्योर्ड बिज़नेस लोन, स्पेशलाइज्ड MSME लोन और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को लोन देती है। 31 दिसंबर 2025 तक, कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹14,448 करोड़ था। इसमें पर्सनल लोन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 55.6% (लगभग ₹8,027 करोड़) रही, जिसके बाद 22.15% (लगभग ₹3,201 करोड़) के साथ स्टूडेंट लोन का नंबर आता है। कंपनी 19 राज्यों में 150 से अधिक ब्रांचों के ज़रिए 17,000 से ज़्यादा पिन कोड पर 5 लाख से ज़्यादा ग्राहकों को सर्विस दे रही है। इसके नेटवर्क में 51 लेंडर्स, जैसे बैंक और म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं।
वैल्यूएशन और सेक्टर का समीकरण
एक अनलिस्टेड एंटिटी के तौर पर, InCred Holdings का वैल्यूएशन हाल के दिनों में करीब ₹9,627 करोड़ आंका गया है, और इसके अनलिस्टेड शेयरों का P/E रेश्यो लगभग 25.8 है। दूसरी ओर, इसके शेयर ₹153 पर ट्रेड हो रहे हैं, जिसका मार्केट कैप ₹9,835.31 करोड़ और P/E 26.88 है। FY25 के अनुमानों के अनुसार, P/B रेश्यो 2.69 और P/E 28.32 रहने का अनुमान है। यह वैल्यूएशन NBFC सेक्टर के लिए काफी सामान्य है, जो अक्सर 2x-4x P/B पर ट्रेड करते हैं। इसकी तुलना में, Bajaj Finance 30-34x P/E पर और Jio Financial Services 131.48x P/E पर ट्रेड कर रहे हैं। Nifty Financial Services Index का P/E 17.1 और P/B 2.84 है। NBFC सेक्टर भारतीय IPO मार्केट में 2025 में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा, जिसने 24 IPOs के ज़रिए ₹635 अरब जुटाए।
रिस्क फैक्टर: अनसिक्योर्ड लोन पर बढ़ी नज़र
ग्रोथ और सॉलिड कैपिटल एडिक्वेसी (24.97% CRAR, जो 15% की रेगुलेटरी मिनिमम से काफी ऊपर है) के बावजूद, InCred एक ऐसे सेगमेंट में काम करती है जिस पर बढ़ती हुई नज़र है। CRISIL रेटिंग्स ने अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन, जो InCred का सबसे बड़ा AUM सेगमेंट (55.6%) है, को संभावित स्ट्रेस और बढ़ती डिलिंक्वेंसी के कारण एक उभरता हुआ रिस्क बताया है। दिसंबर 2025 तक InCred के ग्रॉस स्टेज 3 लोन (NPAs) 2.28% थे, जो एक साल पहले 2.05% थे। नेट NPA 0.87% पर बना हुआ है। हालांकि, छोटे टिकट वाले पर्सनल लोन में बढ़ते NPA और NBFC सेक्टर का मार्केट बॉरोइंग पर निर्भर होना लगातार चुनौतियां पैदा कर रहा है। RBI का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, जिसमें स्केल-बेस्ड रेगुलेशन (SBR) और डिजिटल लेंडिंग के नियम शामिल हैं, के साथ लगातार तालमेल बिठाना और कंप्लायंस करना ज़रूरी है, जिससे ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ती है।
फ्यूचर आउटलुक: ग्रोथ का रास्ता और रेगुलेटरी माहौल
विश्लेषकों का मानना है कि InCred Finance, FY23 से FY25 के बीच प्रॉफिट ग्रोथ (PAT CAGR) के मामले में भारत की सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ने वाली डाइवर्सिफाइड NBFC है और AUM CAGR के मामले में दूसरी सबसे तेज़। इस अवधि में इसका PAT 84.97% CAGR से और AUM 44.04% CAGR से बढ़ा। दिसंबर 2025 में समाप्त नौ महीनों के लिए, नेट प्रॉफिट ₹290 करोड़ रहा, जबकि कुल ₹6,683 करोड़ के लोन बांटे गए। कंपनी का पोर्टफोलियो यील्ड औसतन 18.39% रहा, जबकि बॉरोइंग कॉस्ट 10.05% रही, जो अच्छे स्प्रेड्स दिखाती है। InCred की मजबूत ग्रोथ और कैपिटल बेस को मजबूत करने की योजना इसे भारतीय फाइनेंशियल सर्विसेज मार्केट का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है। सेक्टर में लगातार बढ़ती क्रेडिट डिमांड, खासकर रिटेल में, बड़ी अपॉर्च्युनिटीज़ प्रदान करती है। IPO को सफलतापूर्वक पूरा करना और फंड का सही इस्तेमाल करना इसकी ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण होगा।
