साल 2026 में शेयर बाजार का मिजाज बदला हुआ है। जहाँ Nifty 50 में **11.5%** की गिरावट दिखी है, वहीं Nifty IPO इंडेक्स ने **19.5%** का शानदार उछाल दर्ज किया है, जो नई कंपनियों के प्रति निवेशकों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशक पारंपरिक ब्लू-चिप शेयरों के बजाय नई ग्रोथ-ओरिएंटेड कंपनियों और स्मॉल-मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) पर ज्यादा दांव लगा रहे हैं। इसका सीधा असर इंडेक्स पर दिख रहा है, जहां Nifty IPO इंडेक्स ने साल-दर-साल 19.5% की बढ़त हासिल की है।
SME शेयरों में भी हलचल
स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज भी बाजार में मजबूती बनाए हुए हैं। Nifty SME Emerge इंडेक्स अब तक 5.55% की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है। डेटा के मुताबिक, ₹500 करोड़ से ₹1,000 करोड़ के बीच फंड जुटाने वाली मिड-साइज IPO कंपनियों को निवेशकों का जबरदस्त प्यार मिला है, जिसे औसतन 46.5 गुना तक सब्सक्राइब किया गया है। यह दिखाता है कि मार्केट सेंटीमेंट कमजोर होने के बावजूद निवेशकों की भूख अभी कम नहीं हुई है।
सावधान! हर चमकती चीज सोना नहीं
बाजार की यह रैली हर नए स्टॉक के लिए एक जैसी नहीं है। निवेश करते समय सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि जहां ESDS Software जैसे स्टॉक्स ने 310% का रिटर्न दिया है, वहीं इस साल लिस्ट हुई 81 कंपनियों में से 21 अपने इश्यू प्राइस से भी नीचे ट्रेड कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Shree Ram Twistex के भाव में इश्यू प्राइस से 64% तक की गिरावट आई है।
निवेश का मंत्र
IPO और SME कंपनियों में निवेश का जोखिम बड़ी कंपनियों (Mainboard) के मुकाबले अलग होता है। इन कंपनियों का ट्रैक रिकॉर्ड कम होता है और लिक्विडिटी की समस्या भी हो सकती है। किसी भी कंपनी को चुनने से पहले सिर्फ 'हाइप' (Buzz) पर न जाएं, बल्कि उनके मुनाफे और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर नजर रखें। आने वाली तिमाही के नतीजों (Quarterly Results) से ही यह साफ हो पाएगा कि इन कंपनियों का वैल्यूएशन जायज है या नहीं।
