बाजार के जानकार देवेन चोकसी ने रिटेल निवेशकों को चेतावनी दी है कि वे सिर्फ लिस्टिंग गेन्स के लालच में न पड़ें। कंपनी के बिजनेस मॉडल और उसके फाइनेंशियल को समझे बिना पैसा लगाना भारी जोखिम पैदा कर सकता है।
बहुत से रिटेल निवेशक IPO में पैसा इसलिए लगाते हैं क्योंकि उन्हें 'लिस्टिंग गेन्स' की उम्मीद होती है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर नजर रखना निवेशकों को तुरंत मुनाफे का सपना दिखाता है, लेकिन अक्सर यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में कंपनी से जुड़े कई छिपे हुए जोखिम होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
DRChoksey FinServ के मैनेजिंग डायरेक्टर, देवेन चोकसी का कहना है कि लिस्टिंग डे पर मिलने वाले छोटे मुनाफे के चक्कर में लोग लंबी अवधि के बड़े नुकसान को न्योता देते हैं। महंगी वैल्युएशन पर किसी खराब कंपनी का शेयर खरीद लेना आपकी वेल्थ के लिए खतरनाक है।
फ्रेश इश्यू बनाम ऑफर फॉर सेल (OFS)
निवेशकों को यह समझना होगा कि वे पैसा कहां लगा रहे हैं। IPO दो हिस्सों में बंटा होता है:
- फ्रेश इश्यू: कंपनी नए शेयर जारी कर फंड जुटाती है, जिसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने या बिजनेस बढ़ाने में होता है।
- ऑफर फॉर सेल (OFS): इसमें कंपनी के पुराने प्रमोटर्स या प्राइवेट इक्विटी निवेशक अपने शेयर बेचकर बाहर निकलते हैं।
जब पुराने निवेशक अपना हिस्सा बेचकर निकलते हैं, तो वे अक्सर सबसे ऊंची वैल्युएशन की मांग करते हैं, जिससे नए निवेशकों के लिए आगे कमाई की संभावना बहुत कम रह जाती है।
कैसे करें सही चुनाव?
निवेश करने से पहले इन 4 बातों का ऑडिट जरूर करें:
- ऑफर का मकसद: पैसा किस काम के लिए जुटाया जा रहा है?
- बिजनेस मॉडल: कंपनी क्या काम करती है और कमाई का जरिया क्या है?
- ग्रोथ हिस्ट्री: क्या कंपनी के पिछले नतीजे लगातार मजबूत रहे हैं?
- रिस्क फैक्टर: प्रॉस्पेक्टस में दिए गए जोखिमों को ध्यान से पढ़ें।
याद रखें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी आपको डेटा तो दे सकती है, लेकिन सही फैसला लेने के लिए बिजनेस की समझ और आपका खुद का एनालिसिस ही काम आएगा। लिस्टिंग की चकाचौंध के बजाय कंपनी की असल सेहत को पहचानना ही लंबी अवधि में आपको एक सफल निवेशक बनाएगा।
