Hy-Tech Engineers के IPO में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है। दूसरे दिन की क्लोजिंग तक यह इश्यू **9.22 गुना** सब्सक्राइब हो चुका है, जो मजबूत निवेशक मांग का संकेत है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के मुताबिक, शेयर **56%** तक के प्रीमियम पर लिस्ट हो सकता है।
IPO में क्यों दिख रही इतनी दिलचस्पी?
Hy-Tech Engineers का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) दूसरे दिन निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा। 25 अगस्त की सुबह 10:15 बजे तक, इश्यू 9.22 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। कंपनी इस पब्लिक ऑफर के जरिए कुल ₹135.73 करोड़ जुटाना चाहती है, जिसमें ₹60 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹75.73 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। यह सब्सक्रिप्शन विंडो 27 अगस्त तक खुला रहेगा।
रिटेल निवेशकों का उत्साह
रिटेल निवेशकों ने इस इश्यू में खास दिलचस्पी दिखाई है, जिनका हिस्सा 13.19 गुना सब्सक्राइब हुआ है। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने भी 11 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले, कंपनी ने एंकर राउंड में आठ निवेशकों से ₹40.72 करोड़ जुटाए थे, जिसमें WhiteOak Capital Asset Management का बड़ा योगदान रहा। अनऑफिशियल ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगभग ₹30 के आसपास है, जो अपर प्राइस बैंड ₹53 पर 56% तक के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि GMP अनरेगुलेटेड और अस्थिर होते हैं, और वास्तविक लिस्टिंग परफॉर्मेंस की गारंटी नहीं देते।
कंपनी का बिजनेस और विस्तार की योजना
Hy-Tech Engineers हाइड्रोलिक फिटिंग्स बनाने वाली एक जानी-मानी कंपनी है। मार्च 2026 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में, कंपनी ने ₹189.4 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस और ₹22.6 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने में करेगी। करीब ₹29.96 करोड़ मशीनरी और इक्विपमेंट खरीदने पर खर्च होंगे, जिससे कंपनी कावठे, शिरवाल और पितमपुर स्थित प्लांट्स में प्रोडक्शन बढ़ाएगी। इसके अलावा, ₹16 करोड़ का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज चुकाने में किया जाएगा, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होगी।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जोखिम
कंपनी विस्तार की योजना बना रही है, लेकिन निवेशकों को कुछ प्रमुख जोखिमों पर भी गौर करना चाहिए। सबसे बड़ा जोखिम कस्टमर कंसंट्रेशन है, क्योंकि कंपनी का एक बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा बड़े क्लाइंट्स से आता है। इनमें से किसी भी बड़े कॉन्ट्रैक्ट के खोने से कंपनी की वित्तीय सेहत पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, कंपनी निर्यात पर काफी निर्भर है, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका में। यह भौगोलिक निर्भरता कंपनी को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े जोखिमों, जैसे टैरिफ में बदलाव, इंपोर्ट ड्यूटी या करेंसी में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। कंपनी ऑटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन और फार्मिंग जैसे साइक्लिकल सेक्टर्स में भी काम करती है, जो आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील होते हैं। सप्लाई चेन भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि टॉप सप्लायर्स के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट नहीं हैं, जिससे डिलीवरी में देरी या लागत बढ़ने का खतरा हो सकता है। साथ ही, वर्किंग कैपिटल की जरूरतें भी ज्यादा हैं, क्योंकि फंड का एक बड़ा हिस्सा कस्टमर रिसीवेबल्स में फंसा रहता है।
