क्या हुआ?
Hexagon Nutrition के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया। मंगलवार को बंद हुए इस इश्यू को कुल 14 गुना ज्यादा बोली मिली। न्यूट्रिशन और वेलनेस सेक्टर की यह कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए ₹139 करोड़ जुटाना चाहती थी। कुल मिलाकर, उपलब्ध 2.16 करोड़ शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने लगभग 29.77 करोड़ शेयरों के लिए बिड किया।
किन निवेशकों ने दिखाई दिलचस्पी?
अलग-अलग निवेशक वर्गों की तरफ से प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (HNIs और कॉर्पोरेट इन्वेस्टर्स) ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई, जिनका रिजर्व पोर्शन 33.10 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल इन्वेस्टर्स ने भी खूब भाग लिया और अपने कोटे को 13.27 गुना बुक किया। वहीं, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) यानी म्यूचुअल फंड्स और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए रखे गए पोर्शन को सिर्फ 21% सब्सक्रिप्शन मिला। इससे पहले, एंकर इन्वेस्टर्स से कंपनी ने ₹41.66 करोड़ जुटा लिए थे।
कंपनी के बारे में
1993 में स्थापित Hexagon Nutrition, माइक्रो-न्यूट्रिएंट और क्लिनिकल न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरर है। कंपनी की डोमेस्टिक और इंटरनेशनल मार्केट्स में मौजूदगी है और यह 75 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है। इसके पोर्टफोलियो में Pentasure, Obesigo और Pediagold जैसे पॉपुलर ब्रांड्स शामिल हैं। कंपनी माइक्रो-न्यूट्रिएंट प्रीमिक्स, क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए थेराप्यूटिक न्यूट्रिशन और विभिन्न हेल्थ-फोक्स्ड फोर्टिफाइड फूड प्रोडक्ट्स बनाती है।
जोखिम और इंडस्ट्री की चुनौतियां
न्यूट्रिशन और हेल्थ प्रोडक्ट्स सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को सिर्फ सब्सक्रिप्शन नंबर्स से आगे बढ़कर कुछ बातों पर गौर करना चाहिए। यह सेक्टर काफी कॉम्पिटिटिव है, जहां बड़ी फार्मा कंपनियों और विशाल डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क वाले FMCG दिग्गजों से टक्कर मिलती है। इस सेक्टर में सफलता के लिए ब्रांड लॉयल्टी बनाना और रिटेल आउटलेट्स या हॉस्पिटल्स में अपनी जगह बनाना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा, न्यूट्रिशनल प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी होने के नाते, Hexagon Nutrition को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। एग्री-कमोडिटीज या स्पेशल इंग्रिडिएंट्स की लागत में बदलाव सीधे प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है। 75 देशों में फैले अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क में लगातार डिमांड बनाए रखना भी एक चुनौती है, जिसके लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और एग्जीक्यूशन की जरूरत होगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
12 जून को होने वाली लिस्टिंग के साथ, शेयरधारकों का फोकस अब स्टॉक एक्सचेंजों पर कंपनी के डेब्यू पर रहेगा। हालांकि ज्यादा सब्सक्रिप्शन मार्केट की दिलचस्पी का संकेत देता है, लेकिन लिस्टिंग वाले दिन शुरुआती ट्रेडिंग प्राइस डिमांड और सप्लाई के आधार पर तय होगा। निवेशक कंपनी के मैनेजमेंट से भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी और IPO से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल के बारे में कमेंट्री सुन सकते हैं। कंपनी की विजिबिलिटी और ब्रांड पहचान को लगातार रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर प्रॉफिट मार्जिन में बदलने की क्षमता को समझने के लिए भविष्य की तिमाही रिपोर्ट्स महत्वपूर्ण होंगी।
