Hero Motors का IPO **5.47** गुना भरकर बंद हुआ है। रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने तो दम दिखाया, लेकिन क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की तरफ से सुस्त रिस्पॉन्स ने बाजार की उम्मीदों को थोड़ा ठंडा कर दिया है।
आंकड़ों का गणित
तीन दिनों की बिडिंग प्रोसेस के दौरान कंपनी को 8.86 मिलियन शेयरों के ऑफर के मुकाबले 48.46 मिलियन शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। रिटेल निवेशकों का उत्साह देखते ही बनता था, जिन्होंने अपने कोटे को 7.33 गुना सब्सक्राइब किया, वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (HNI) ने 7.66 गुना आवेदन किए।
QIB ने क्यों दिखाई दूरी?
बाजार के जानकारों का मानना है कि इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की 0.57 गुना की कमजोर भागीदारी कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर एक सवालिया निशान है। यह हिस्सा लंबी अवधि के भरोसे का बैरोमीटर माना जाता है, जहाँ से मिली ठंडी प्रतिक्रिया चिंता का विषय है।
फंड का उपयोग और कर्ज
कंपनी इस IPO के जरिए ₹1,000 करोड़ जुटाना चाहती है, जिसमें ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य गौतम बुद्ध नगर स्थित फैसिलिटी का विस्तार और ₹400.79 करोड़ के कर्ज को कम करना है। कर्ज कम होने से कंपनी की बैलेंस शीट तो सुधरेगी, लेकिन निवेशकों की नजरें इसके कॉम्पिटिटिव मार्केट में टिके रहने पर हैं।
ग्रे मार्केट का ठंडा रुख
IPO बंद होने के साथ ही ग्रे मार्केट में भी उत्साह कम हो गया है। कभी ₹24 का प्रीमियम दिखाने वाला यह शेयर अब महज ₹3 के प्रीमियम पर सिमट गया है, जो ₹84 के अपर प्राइस बैंड पर सिर्फ 3.57% की संभावित बढ़त की ओर इशारा कर रहा है। अब लिस्टिंग के दिन शेयर का प्रदर्शन ही निवेशकों का असली इम्तिहान होगा।
