Goldline Pharma IPO: कर्ज चुकाने पर फोकस, निवेशकों ने लगाया दांव
Goldline Pharmaceutical का IPO निवेशकों के बीच काफी हिट रहा। पहले दिन की क्लोजिंग तक यह ओवरऑल 20.79 गुना सब्सक्राइब हो गया। इसमें रिटेल निवेशकों का हिस्सा सबसे ज्यादा, 34.07 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NIIs) ने 18.07 गुना और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 1.31 गुना अपनी हिस्सेदारी भरी। कंपनी इस IPO के जरिए ₹11.61 करोड़ जुटा रही है, जिसका शेयर प्राइस ₹41 से ₹43 के बीच है। खास बात यह है कि जुटाए गए फंड्स में से ₹8.35 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज (debt) को चुकाने में करेगी। यह कदम कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करने और ब्याज के बोझ को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।
RFBL Flexi Pack IPO: विस्तार की योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
दूसरी ओर, RFBL Flexi Pack के IPO की मांग थोड़ी धीमी, लेकिन सकारात्मक रही। पहले दिन यह 1.18 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NIIs) की मांग 1.59 गुना, QIBs की 1.11 गुना और रिटेल निवेशकों की 1.07 गुना रही। कंपनी इस IPO से ₹35.33 करोड़ जुटाएगी, जिसका प्राइस बैंड ₹47-50 प्रति शेयर है। RFBL इस फंड का इस्तेमाल गुजरात में नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने के लिए जमीन खरीदने और उसे स्थापित करने में करेगी, जिसके लिए ₹12.4 करोड़ रखे गए हैं। इसके अलावा ₹17.76 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। यह कदम कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, खासकर FMCG और फार्मा सेक्टर से बढ़ती मांग को देखते हुए।
बाजार का मिजाज, वैल्यूएशन और जोखिम
14 मई, 2026 को दोनों IPO की सब्सक्रिप्शन विंडो बंद हो जाएगी। मौजूदा बाजार में निवेशक सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं, खासकर ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच। Goldline Pharma का IPO जहां अपनी वित्तीय सेहत सुधारने पर केंद्रित है, वहीं RFBL फ्लेक्सी पैक विस्तार की राह पर है।
Goldline का प्री-IPO P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) रेश्यो करीब 9.75x था, जो IPO के बाद 15.19x हो जाएगा। RFBL का पोस्ट-IPO P/E भी अपर बैंड पर लगभग 15.19x के आसपास है, जो Uma Converter और Sabar Flex जैसे प्रतिस्पर्धियों के समान है।
हालांकि, RFBL के 0.80 के ऊंचे डेट-टू-इक्विटी रेश्यो और 62% ट्रेडिंग रेवेन्यू पर ध्यान देना होगा। Goldline के लिए मुख्य जोखिम ₹3.34 करोड़ के एक्टिव टैक्स प्रोसीडिंग्स हैं, और इसका एसेट-लाइट मॉडल तीसरे पक्ष के मैन्युफैक्चरर्स पर निर्भरता बढ़ाता है। RFBL के लिए 93.85% रेवेन्यू टॉप पांच ग्राहकों से आना, लंबे कॉन्ट्रैक्ट्स का न होना, 52% की कम कैपेसिटी यूटिलाइजेशन, FY25 में निगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो और पिछले गवर्नेंस इश्यूज चिंता का विषय हैं।
पैकेजिंग सेक्टर में 2035 तक महत्वपूर्ण विस्तार की उम्मीद है, लेकिन इन कंपनियों के IPO में निवेशकों को अपनी रिसर्च जरूर करनी चाहिए।
