German Green Steel and Power के शेयरों की बाजार में एंट्री कुछ खास नहीं रही। ₹139 के इश्यू प्राइस के मुकाबले शेयर महज 3% के मामूली प्रीमियम पर लिस्ट हुए, जबकि निवेशकों को ग्रे मार्केट से बेहतर उम्मीदें थीं।
बाजार में फीकी एंट्री
5 अक्टूबर, 2026 को German Green Steel and Power की शेयर बाजार में एंट्री हुई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर ₹142 और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ₹143.50 के आसपास खुले। यह बढ़त इश्यू प्राइस से महज 2% से 3% के बीच रही, जो निवेशकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।
IPO का गणित और विस्तार की योजना
आईपीओ के दौरान निवेशकों ने जमकर दिलचस्पी दिखाई थी और इसे 30.42 गुना सब्सक्राइब किया गया था। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का हिस्सा 56.77 गुना भरा था। कुल ₹303.90 करोड़ के इस इश्यू में ₹290 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹13.90 करोड़ का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल था।
कंपनी का मैनेजमेंट इस पूंजी का इस्तेमाल गुजरात के समाखियाली में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और विंड-सोलर हाइब्रिड प्रोजेक्ट के लिए करेगा। इसके अलावा, ₹7.70 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज घटाने के लिए होगा। मार्च 2026 तक कंपनी पर कुल ₹334.37 करोड़ का कर्ज था, जिसे कम करना कंपनी की प्रायोरिटी है।
निवेश से पहले इन जोखिमों को समझें
कंपनी के रेवेन्यू का 97.74% हिस्सा सिर्फ गुजरात मार्केट से आता है, जो एक बड़ा भौगोलिक जोखिम (Geographic Concentration Risk) है। साथ ही, कंपनी की निर्भरता लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के बजाय शॉर्ट-टर्म ऑर्डर्स पर है और टॉप 10 ग्राहक कुल रेवेन्यू का 50% से ज्यादा योगदान देते हैं।
इसके अलावा, आयरन ओर, कोल और स्क्रैप की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों के लिए कंपनी का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि वह अपनी क्षमता का विस्तार कितनी तेजी से करती है और अपने कस्टमर बेस को कितनी जल्दी डाइवर्सिफाई कर पाती है।
