Gaudium IVF IPO: निवेशकों की पहली पसंद! पहली फर्टिलिटी कंपनी का IPO हुआ फुल सब्सक्राइब

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gaudium IVF IPO: निवेशकों की पहली पसंद! पहली फर्टिलिटी कंपनी का IPO हुआ फुल सब्सक्राइब
Overview

Gaudium IVF के IPO में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है। कंपनी का **₹165 करोड़** का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) दूसरे दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है।

सेक्टर की पहली कंपनी का कमाल

Gaudium IVF and Women Health का ₹165 करोड़ का IPO सार्वजनिक बाजारों में उतरने वाली भारत की पहली प्योर-प्ले फर्टिलिटी सर्विसेज प्रोवाइडर के तौर पर एक बड़ा माइलस्टोन साबित हुआ है। यह कदम तेज़ी से बढ़ते और ऐतिहासिक रूप से कम पैठ वाले सेक्टर में उठाया गया है। भारतीय फर्टिलिटी सर्विसेज मार्केट का अनुमान $3.2 बिलियन से $4.41 बिलियन तक पहुँचने का है, जिसमें 9.6% से 17.5% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिखने की उम्मीद है। कंपनी अपने 30 से ज़्यादा सेंटर्स वाले हब-एंड-स्पोक मॉडल का इस्तेमाल करती है, जो IVF और IUI जैसी विशेष सेवाएं प्रदान करता है। इनका IVF सक्सेस रेट लगभग 58.74% है, जो इंडस्ट्री एवरेज 40-45% से काफी बेहतर है। IPO से मिली पूंजी का इस्तेमाल 19 नए IVF सेंटर खोलने, कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा।

सब्सक्रिप्शन की रफ्तार और वैल्युएशन

यह IPO, जो 20 फरवरी को खुला और 24 फरवरी, 2026 को बंद हुआ, निवेशकों की ज़बरदस्त मांग देखी गई, जिससे यह दूसरे दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। 1.46 करोड़ शेयरों के मुकाबले 2.44 करोड़ शेयरों के लिए बिड (Bid) मिली, जो कुल मिलाकर 1.67 गुना सब्सक्रिप्शन दर्शाता है। रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स ने अपने हिस्से का 2.41 गुना सब्सक्राइब किया, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने 2.18 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ अच्छी रुचि दिखाई। पब्लिक ऑफरिंग से पहले, Gaudium IVF ने एंकर इन्वेस्टर्स से ₹49.5 करोड़ सफलतापूर्वक जुटाए थे। ₹75-₹79 के प्राइस बैंड में, IPO ने कंपनी को लगभग ₹575 करोड़ का वैल्युएशन दिया है। यह प्री-IPO प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 25.36 गुना FY25 की कमाई पर आधारित है, जिसे प्रीमियम माना जा रहा है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लिस्टिंग से पहले 10-13% के आसपास का मामूली गेन दिखा रहा था।

ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट में जगह

Gaudium IVF अपनी मज़बूत फाइनेंशियल परफॉरमेंस, खासकर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी के लिए जानी जाती है। कंपनी ने 40-45% के आसपास मज़बूत EBITDA मार्जिन और FY25 में लगभग 26.96% का नेट प्रॉफिट मार्जिन दर्ज किया। FY25 में इनका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 41.31% था, जो शेयरहोल्डर कैपिटल पर हाई प्रॉफिटेबिलिटी दर्शाता है। बड़े प्लेयर Indira IVF की तुलना में, जिसके FY25 में EBITDA मार्जिन 33.4% थे, Gaudium अपने केंद्रित हब-एंड-स्पोक नेटवर्क के ज़रिए ज़्यादा प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखती है। वैश्विक साथियों (जैसे Progyny Inc.) की तुलना में छोटी होने के बावजूद, Gaudium का स्पेशलाइज्ड मॉडल और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी भारतीय बाज़ार में एक मज़बूत कॉम्पिटिटिव एज देती है।

संभावित जोखिम (Bear Case)

सकारात्मक मार्केट रिसेप्शन और मज़बूत ऑपरेशनल मेट्रिक्स के बावजूद, Gaudium IVF के सामने कई रिस्क हैं। कंपनी ₹31 करोड़ के एक बड़े टैक्स डिस्प्यूट का सामना कर रही है, जिसका नतीजा फाइनेंशियल्स को प्रभावित कर सकता है। अत्यधिक कुशल मेडिकल प्रोफेशनल्स पर निर्भरता एक चुनौती है, क्योंकि एट्रिशन (Attrition) से सर्विस डिलीवरी बाधित हो सकती है। इसके अलावा, भारत में ART (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) सेक्टर एक विकसित हो रहे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (ART (Regulation) Act 2021) के तहत काम करता है। इस कानून का मकसद प्रैक्टिस को स्टैंडर्डाइज़ करना है, लेकिन एनफोर्समेंट, सक्सेस रेट्स में पारदर्शिता और संभावित एक्सक्लूसन (exclusionary criteria) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जो भविष्य की सर्विस डिलीवरी या मार्केट एक्सेस को प्रभावित कर सकती हैं। मज़बूत कॉम्पिटिशन, जिसमें बड़े प्लेयर्स और संभावित नए एंट्री करने वाले शामिल हैं, सेक्टर के मैच्योर होने पर मार्जिन और मार्केट शेयर पर दबाव डाल सकते हैं।

भविष्य की राह

Gaudium IVF का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपने एक्सपेंशन प्लान्स को कितनी सफलतापूर्वक लागू कर पाती है, साथ ही इसे एक स्पेशलाइज्ड और रेगुलेटेड इंडस्ट्री की जटिलताओं से निपटना होगा। पब्लिक मार्केट में इसका फर्स्ट-मूवर एडवांटेज इसे भारत के फर्टिलिटी सर्विसेज सेक्टर की मज़बूत ग्रोथ प्रोजेक्शन का फायदा उठाने की स्थिति में रखता है। हालांकि, लगातार प्रॉफिटेबिलिटी ऑपरेशनल कॉस्ट्स को मैनेज करने, स्पेशलाइज्ड टैलेंट को बनाए रखने और रेगुलेटरी बदलावों के अनुकूल होने पर निर्भर करेगी। प्रीमियम वैल्युएशन से पता चलता है कि मार्केट ने पहले से ही महत्वपूर्ण भविष्य की ग्रोथ को प्राइस-इन (price-in) कर लिया है, इसलिए लगातार एग्जीक्यूशन और मार्केट शेयर में बढ़त निवेशक की उम्मीदों को सही ठहराने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
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