क्यों बट रहा है निवेशकों का रुझान?
GSP Crop Science के ₹400 करोड़ के आईपीओ के दूसरे दिन बोली में निवेशकों की मांग बंटी हुई दिख रही है। 17 मार्च, 2026 की दोपहर तक, यह आईपीओ 65% तक भर चुका था। इसमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने दिखाई, जिन्होंने अपनी हिस्सेदारी का 1.28 गुना सब्सक्राइब किया। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) भी लगभग पूरी तरह से भर चुके थे, उन्होंने 0.93 गुना बोली लगाई।
इसके ठीक उलट, खुदरा निवेशकों (Retail Investors) ने अब तक अपनी कोटे का सिर्फ 0.15 गुना ही सब्सक्राइब किया है। यह असमान भागीदारी बताती है कि बड़े निवेशक कंपनी की कर्ज घटाने की योजनाओं को अहम मान रहे हैं, जबकि कई खुदरा निवेशक वैल्यूएशन या सेक्टर के जोखिमों को लेकर थोड़ा झिझक रहे हैं। इस आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल ₹0 पर है, जो एक फ्लैट लिस्टिंग की ओर इशारा कर रहा है।
सेक्टर ग्रोथ और वैल्यूएशन का गणित
GSP Crop Science भारत के एग्रोकेमिकल सेक्टर में काम करती है, जिसके 2030 तक 13% सालाना की दर से बढ़कर $13 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है। कंपनी का आईपीओ ₹304 से ₹320 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर है, जो ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹1,489 करोड़ है। यह वित्त वर्ष 25 (FY25) की कमाई के हिसाब से लगभग 18.3x के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो पर है।
यह वैल्यूएशन PI Industries (P/E ~30.4x) और UPL Ltd (P/E ~23.94x) जैसे बड़े खिलाड़ियों की तुलना में प्रतिस्पर्धी लगता है, लेकिन Dhanuka Agritech जैसे कुछ घरेलू केंद्रित कंपनियों के मुकाबले प्रीमियम पर है। कंपनी आईपीओ से जुटाई गई राशि में से ₹170 करोड़ का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए करेगी, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। GSP Crop Science के पास कीटनाशकों, शाकनाशियों, फफूंदनाशकों और प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स की एक विस्तृत रेंज है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में बिकती है।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि, इस सेक्टर में कुछ जोखिम भी हैं। 2026 में एल नीनो (El Niño) के कारण कमजोर मानसून की भविष्यवाणी के चलते, कंपनी की मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, एग्रोकेमिकल उद्योग काफी रेगुलेटेड है, जहां उत्पाद पंजीकरण और मंजूरी में देरी एक चुनौती हो सकती है। सेक्टर में प्रतिस्पर्धा भी कड़ी बनी हुई है।
खुदरा निवेशकों की कम भागीदारी 2026 में जारी आईपीओ बाजार में फैली व्यापक सावधानी को दर्शाती है, जहां हाल की कई लिस्टिंग्स ने उम्मीद से खराब प्रदर्शन किया है। ब्रोकरेज फर्मों जैसे BP Equities और Marwadi Financial Services ने कंपनी के विविध उत्पादों और उचित वैल्यूएशन को देखते हुए 'सब्सक्राइब' करने की सलाह दी है। वहीं, SBI Securities ने मौसमी मांग और इनपुट लागतों से जुड़े जोखिमों का हवाला देते हुए इश्यू को 'पूरी तरह से कीमत' (Fully Priced) वाला माना है।
आईपीओ 18 मार्च, 2026 को बंद होगा। 24 मार्च, 2026 को होने वाली लिस्टिंग का प्रदर्शन काफी हद तक संस्थागत समर्थन पर निर्भर करेगा, ताकि खुदरा निवेशकों की झिझक को संतुलित किया जा सके।
