Flipkart अपने कर्मचारियों के लिए 2026 की शुरुआत में एक नया ESOP लिक्विडिटी प्रोग्राम लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कर्मचारी अपने **20-25%** वेस्टेड शेयर्स को कैश करा सकेंगे। IPO में देरी के चलते टैलेंट को रिटेन करने के लिए कंपनी यह कदम उठा रही है।
IPO में देरी और कर्मचारियों की चिंता
Flipkart के पब्लिक मार्केट में उतरने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। पैरेंट कंपनी Walmart की सतर्क रणनीति के चलते IPO में 1 से 2 साल की और देरी हो सकती है। इस देरी के कारण कर्मचारियों में बढ़ती निराशा को देखते हुए, कंपनी 2026 की शुरुआत में एक नई लिक्विडिटी विंडो खोलने पर विचार कर रही है। इससे पात्र कर्मचारी अपनी 20% से 25% तक की इक्विटी लिक्विडेट कर पाएंगे।
पिछला बायबैक और टैलेंट रिटेंशन
जुलाई 2026 में कंपनी ने $50 मिलियन का एक छोटा बायबैक प्रोग्राम चलाया था, जिसमें कर्मचारियों को 5% तक शेयर बेचने की अनुमति मिली थी। हालांकि, IPO में देरी के कारण सीनियर लीडरशिप का कंपनी छोड़ना कंपनी के लिए चुनौती बना हुआ है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का दबाव
कंपनी के लिए अब प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान देना जरूरी है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में Flipkart का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹82,787 करोड़ रहा, लेकिन इसके साथ ही कंपनी को ₹5,189 करोड़ का नेट लॉस भी हुआ। रेगुलेटर्स के पास जाने से पहले कंपनी अब अपने ब्रेक-ईवन टारगेट्स को पूरा करने में जुटी है।
टैक्स का नया एंगल
अगस्त 2026 में Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिसके अनुसार अन-एक्सरसाइज्ड ESOPs के बायबैक से होने वाले मुनाफे को सैलरी के बजाय 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स' माना जाएगा। इस फैसले से कर्मचारियों को टैक्स के मामले में बड़ी राहत मिली है, जो इन बायबैक स्कीम्स में भाग लेने वाले कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है।
