Flipkart में सीनियर मैनेजमेंट के स्तर पर इस्तीफों का दौर जारी है। पैरेंट कंपनी Walmart फिलहाल IPO के बजाय मुनाफे (Profitability) और 'Minutes' क्विक-कॉमर्स सर्विस के विस्तार पर जोर दे रही है।
मैनेजमेंट में बड़े फेरबदल का असर
Flipkart के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हाल के हफ्तों में कंपनी की स्ट्रैटेजी, फाइनेंस और सप्लाई चेन जैसे अहम विभागों के सीनियर अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा उन पिछली हाई-प्रोफाइल एग्जिट्स के बाद आया है, जिसमें ग्रुप के पूर्व CFO और Myntra के CEO शामिल थे। कंपनी के भीतर हो रही इस उथल-पुथल ने मैनेजमेंट की स्टेबिलिटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
IPO का गणित और Walmart की रणनीति
Walmart का पूरा फोकस अब पब्लिक लिस्टिंग की जल्दबाजी से हटकर ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने पर है। हालांकि कंपनी ने 2026 की शुरुआत में अपना कॉर्पोरेट बेस सिंगापुर से भारत शिफ्ट कर लिया था, जो भविष्य में घरेलू मार्केट में IPO लाने की दिशा में एक बड़ा कदम था, लेकिन फिलहाल किसी भी निश्चित टाइमलाइन का खुलासा नहीं किया गया है।
क्विक-कॉमर्स में बड़ी जंग
मैनेजमेंट में बदलाव के बावजूद Flipkart ने अपनी 'Minutes' सर्विस के साथ मार्केट में आक्रामक विस्तार किया है। कंपनी ने 130 से ज्यादा शहरों में 1,000 से अधिक माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर स्थापित कर लिए हैं। इस कदम का सीधा मकसद Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर देना है।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
इन्वेस्टर्स की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या नई लीडरशिप 'Minutes' को बिना मार्जिन पर असर डाले सफल बना पाएगी। कंपनी का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कैसे अपनी विस्तार योजना को मुनाफे के साथ जोड़ती है और इस संक्रमण काल में अपनी टैलेंट टीम को बरकरार रखती है।
