साल 2026 में Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने सेकेंडरी मार्केट से रिकॉर्ड **₹3.64 ट्रिलियन** निकाले हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने नए IPOs में **₹56,485 करोड़** का निवेश भी किया है। अब बाजार की नजरें **21 अक्टूबर** को आने वाले **₹30,000 करोड़** से ज्यादा के Jio Platforms IPO पर टिकी हैं।
विदेशी निवेशकों (FPIs) की रणनीति में इस साल एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 12 अक्टूबर, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, जहां एक तरफ पुराने लिस्टेड शेयरों से भारी पैसा निकाला जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नए IPOs के प्रति उनका आकर्षण बरकरार है। यह ट्रेंड बताता है कि विदेशी निवेशक भारत को पूरी तरह छोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि वे धीमी ग्रोथ वाले शेयरों से निकलकर नए, हाई-ग्रोथ मौकों की तलाश कर रहे हैं।
बाजार में गिरावट के कारण
2026 में भारतीय सेकेंडरी मार्केट, जैसे कि निफ्टी (Nifty), में 13.8% से लेकर 15.5% तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस दबाव के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5% से ऊपर बने रहना है। जब अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकलकर सुरक्षित एसेट क्लास की ओर चला जाता है।
घरेलू निवेशकों का सहारा (DIIs)
FPIs की भारी बिकवाली के बीच भारतीय बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने सहारा दिया है। इस साल DIIs ने ₹6.83 ट्रिलियन का निवेश कर बाजार को गिरने से बचाया है, जो भारतीय लिक्विडिटी की ताकत को दर्शाता है।
आगे की बड़ी चुनौती
अब सबकी निगाहें Jio Platforms के मेगा IPO पर हैं, जिसका साइज ₹30,000 करोड़ से ₹38,000 करोड़ के बीच हो सकता है। मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि इतना बड़ा इश्यू बाजार की लिक्विडिटी को सोख सकता है। अगर निवेशक इस IPO के लिए अपने मौजूदा पोर्टफोलियो को बेचते हैं, तो सेकेंडरी मार्केट में शॉर्ट-टर्म के लिए अस्थिरता बढ़ सकती है।
