कोयंबटूर स्थित Eswari Global Metal Industries ने IPO के लिए SEBI के पास शुरुआती कागजात (DRHP) जमा कर दिए हैं। कंपनी ₹1,300 करोड़ जुटाना चाहती है, जिसमें ₹500 करोड़ के फ्रेश इश्यू और बाकी OFS (ऑफर फॉर सेल) शामिल है। इस पैसे का इस्तेमाल **₹250 करोड़** का कर्ज चुकाने और गुजरात में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा।
क्या हुआ?
मेटल रीसाइक्लिंग सेक्टर की कोयंबटूर की कंपनी Eswari Global Metal Industries ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपनी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल की है। कंपनी अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए ₹1,100 करोड़ से ₹1,300 करोड़ के बीच फंड जुटाने की योजना बना रही है। इस ऑफर में ₹500 करोड़ के फ्रेश शेयर इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों व प्रमोटरों द्वारा 1.33 करोड़ शेयरों की ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है।
फंड का इस्तेमाल
निवेशक आमतौर पर यह जानना चाहते हैं कि कंपनी IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कैसे करेगी। Eswari Global Metal ने फ्रेश इश्यू से जुटाई जाने वाली ₹500 करोड़ की रकम के लिए खास लक्ष्य रखे हैं। इसमें से एक बड़ा हिस्सा, ₹250 करोड़, मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। 31 दिसंबर 2025 तक, कंपनी पर कुल ₹379.75 करोड़ का बकाया कर्ज था। इस कर्ज के एक महत्वपूर्ण हिस्से को चुकाकर, कंपनी ब्याज के बोझ को कम करना चाहती है। इसके अतिरिक्त, कंपनी ₹150 करोड़ का उपयोग गुजरात के मुंद्रा में अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा के दूसरे चरण के लिए आंशिक वित्तपोषण के तौर पर करेगी।
बिजनेस मॉडल और वित्तीय स्थिति
Eswari Global Metal मल्टी-मेटल और वेस्ट रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी गैर-लौह धातुओं (जैसे सीसा, एल्यूमीनियम और तांबा) और प्लास्टिक जैसे सामग्रियों को रीसायकल करके शुद्ध सीसा, सीसा मिश्र धातु और प्लास्टिक ग्रेन्युल जैसे वैल्यू-एडेड उत्पाद बनाती है। इन उत्पादों की सप्लाई बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोटिव और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में की जाती है। नौ महीने की अवधि, जो दिसंबर 2025 को समाप्त हुई, के लिए कंपनी ने ₹1,401.5 करोड़ का रेवेन्यू और ₹83.9 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
सेक्टर और ऑपरेशनल जोखिम
रीसाइक्लिंग और मेटल प्रोसेसिंग सेक्टर की कई कंपनियों की तरह, Eswari Global Metal को भी कुछ खास ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह बिजनेस कच्चे माल की कीमतों पर बहुत अधिक निर्भर करता है, जो वैश्विक मेटल मार्केट के आधार पर घटती-बढ़ती रहती हैं। यदि कच्चे माल की लागत में काफी वृद्धि होती है और कंपनी इन लागतों को ग्राहकों पर डालने में असमर्थ रहती है, तो लाभ मार्जिन पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, रीसाइक्लिंग व्यवसाय सख्त पर्यावरण और ई-कचरा प्रबंधन नियमों के तहत काम करते हैं। कचरा रीसाइक्लिंग या पर्यावरणीय अनुपालन से संबंधित सरकारी नीतियों में कोई भी बदलाव संचालन को प्रभावित कर सकता है।
निवेशक क्या ट्रैक करें
संभावित निवेशक इस फाइलिंग के बाद कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर नजर रख सकते हैं। पहला, मुंद्रा में कंपनी के विस्तार की सफलता महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भविष्य की उत्पादन क्षमता और राजस्व वृद्धि निर्धारित करेगी। दूसरा, कर्ज में कमी एक प्रमुख निगरानी योग्य कारक बनी हुई है, क्योंकि यह सीधे ब्याज व्यय को कम करके कंपनी के बॉटम लाइन को प्रभावित करती है। अंत में, विश्लेषक इस बात पर ध्यान देंगे कि कंपनी मेटल की कीमतों की अस्थिरता का प्रबंधन कैसे करती है, जो किसी भी मेटल रीसाइक्लिंग व्यवसाय के लाभ मार्जिन का एक प्रमुख कारक है।
