फिटनेस और लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म Cult.fit ने IPO के लिए अपनी ड्राफ्ट फाइलिंग जमा कर दी है। कंपनी ₹950 करोड़ जुटाने की तैयारी में है, जिसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने, नए फिटनेस सेंटर खोलने और अपनी सब्सिडियरी Cultsport में निवेश करने के लिए किया जाएगा। FY26 में कंपनी ने ₹1,720.61 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था।
IPO से जुटेंगे ₹950 करोड़
बेंगलुरु की फिटनेस और लाइफस्टाइल कंपनी Cult.fit ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपने IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी इस इश्यू के जरिए ₹950 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसके अलावा, मौजूदा शेयरधारक 17.86 करोड़ शेयरों की पेशकश (Offer for Sale) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
बिजनेस ग्रोथ और वित्तीय प्रदर्शन
Cult.fit ने हाल के वर्षों में मुनाफे की ओर बढ़त दिखाई है। 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए, कंपनी ने ₹1,720.61 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹1,262.78 करोड़ की तुलना में 36.26% अधिक है। सबसे खास बात यह है कि कंपनी का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन FY26 में 8.41% के पॉजिटिव लेवल पर पहुंच गया, जबकि FY25 में यह -2.76% था। मार्च 2026 तक, कंपनी भारत के 77 शहरों में 708 फिटनेस सेंटर का संचालन कर रही थी।
पूंजी आवंटन और कर्ज प्रबंधन
IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को चुकाने में करेगी, जिससे उसकी बैलेंस शीट को मजबूती मिलेगी। फंड का एक हिस्सा नए 'Cult Elite' और 'Cult Neo' सेंटर्स के विस्तार के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कंपनी अपनी सब्सिडियरी Cultsport Private Ltd. में निवेश कर नए एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट लॉन्च करने की भी योजना बना रही है। बाकी बची राशि का उपयोग ब्रांड मार्केटिंग, फैसेलिटी लीज पेमेंट और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।
मार्केट पोजिशन और कॉम्पिटिशन
मुकेश बंसल, अंकित नागौरी और ऋषभ तेलंग द्वारा 2016 में स्थापित Cult.fit ने वेंचर फंडिंग के जरिए तेजी से ग्रोथ की और 2021 में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया। Zomato और Tata Digital जैसे बड़े निवेशकों ने पहले कंपनी को सपोर्ट किया है। भारत का फिटनेस सेक्टर काफी बिखरा हुआ है, और Cult.fit को क्षेत्रीय जिम चेन, बुटीक फिटनेस स्टूडियो और डिजिटल हेल्थ ऐप्स से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने सदस्यों की ग्रोथ बनाए रखने के साथ-साथ फिजिकल जिम ऑपरेशन और रिटेल स्टोर विस्तार से जुड़ी ऊंची फिक्स्ड कॉस्ट को कैसे मैनेज करती है। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि फिजिकल सेंटर ग्रोथ पर कंपनी की निर्भरता रियल एस्टेट लागत और बड़े नेटवर्क में उच्च उपयोग दर बनाए रखने की क्षमता से जुड़े जोखिमों को बढ़ाती है। नियामक से हरी झंडी मिलने के बाद ही कंपनी IPO की टाइमलाइन और प्राइसिंग को फाइनल कर पाएगी।
