Cult.fit IPO: ₹950 करोड़ जुटाएगी कंपनी, जानिए क्या है प्लान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Cult.fit IPO: ₹950 करोड़ जुटाएगी कंपनी, जानिए क्या है प्लान

फिटनेस और वेलनेस सेक्टर की जानी-मानी कंपनी Cult.fit ने अपना IPO लाने की तैयारी कर ली है। कंपनी ने ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए हैं, जिसके जरिए वह ₹950 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है।

Cult.fit की IPO की पहली झलक

भारत में फिटनेस और वेलनेस की दुनिया में अपनी खास पहचान बना चुकी कंपनी Cult.fit ने पब्लिक मार्केट में डेब्यू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने रेगुलेटर्स के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर दिया है। इसके जरिए कंपनी नए शेयर्स जारी कर ₹950 करोड़ जुटाने का इरादा रखती है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने ग्रोथ प्लान्स को पूरा करने के लिए करेगी, हालांकि फंड के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत जानकारी आने वाले समय में दी जाएगी।

ऑफर फॉर सेल (OFS) और निवेशकों की भागीदारी

फ्रेश इश्यू के अलावा, इस IPO में ऑफर फॉर सेल (OFS) का भी प्रावधान है। इसके तहत, मौजूदा शेयरधारक 17.86 करोड़ इक्विटी शेयर्स तक की बिक्री कर सकते हैं। जहां फ्रेश इश्यू से जुटाया गया पैसा सीधे कंपनी के ऑपरेशन्स या विस्तार के लिए जाता है, वहीं OFS से प्राप्त राशि बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी। यह उन शुरुआती निवेशकों और प्राइवेट इक्विटी फर्मों के लिए एग्जिट का रास्ता भी खोलता है।

Cult.fit ने सालों से कई बड़े निवेशकों का भरोसा जीता है। इसके शेयरधारकों में सिंगापुर का सॉवरेन वेल्थ फंड Temasek और फूड डिलीवरी कंपनी Zomato जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा, वेंचर कैपिटल फर्म Accel भी इस बिजनेस में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए है। इन बड़े निवेशकों की मौजूदगी से कंपनी के वैल्यूएशन और गवर्नेंस को लेकर बाज़ार को अंदाज़ा मिलता है, हालांकि IPO की फाइनल प्राइसिंग अभी तय होनी बाकी है।

मार्केट का माहौल और आगे क्या?

भारत में फिटनेस और वेलनेस सेक्टर में गलाकाट प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। नए हेल्थ प्लेटफॉर्म्स, प्रीमियम जिम चेन्स और छोटे वर्कआउट स्टूडियोज़ के आने से यह सेक्टर और भी कॉम्पिटिटिव हो गया है। संभावित निवेशकों के लिए कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी की राह और यह किस तरह प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में अपनी अलग पहचान बनाती है, यह देखना अहम होगा। निवेशक इस बात पर भी गौर करेंगे कि कंपनी जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कैसे करती है ताकि वह विस्तार कर सके और उसके कैश रिजर्व पर ज्यादा दबाव न आए।

जैसे-जैसे रेगुलेटरी रिव्यू का प्रोसेस आगे बढ़ेगा, मार्केट पार्टिसिपेंट्स को रेगुलेटर्स की फाइनल मंजूरी, प्राइस बैंड और एंकर इन्वेस्टर व पब्लिक बिडिंग की तारीखों जैसी जानकारियों पर नज़र रखनी चाहिए। कंपनी का भविष्य का फाइनेंशियल परफॉरमेंस, खासकर खर्चों को कंट्रोल करते हुए ऑपरेशन्स को बढ़ाने की क्षमता, लिस्टिंग के बाद वैल्यूएशन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

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