लिस्टिंग डे पर ही दिखा भारी डिस्काउंट, निवेशकों में घबराहट
Clean Max Enviro Energy Solutions का शेयर बाजार में डेब्यू उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर अपने IPO प्राइस ₹1,053 के मुकाबले 8.83% की गिरावट के साथ ₹960 पर लिस्ट हुआ। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर यह 9.57% डिस्काउंट के साथ ₹952 पर खुला। ट्रेडिंग के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ा और शेयर ₹761.80 के निचले स्तर तक पहुंच गया। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर ₹8,965 करोड़ रह गया। 2026 में यह पांचवां ऐसा मामला है जब कोई मेनबोर्ड IPO अपने इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हुआ है, जो नए इश्यू के प्रति निवेशकों के घटते उत्साह को दर्शाता है।
प्राइमरी मार्केट में नरमी, IPO की मांग भी थी कमजोर
Clean Max के IPO को शुरुआत से ही कमजोर मांग मिली थी। ओवरऑल यह 0.99 गुना ही सब्सक्राइब हो पाया, जिसमें रिटेल निवेशकों की भागीदारी सिर्फ 0.07 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) की 0.57 गुना रही। यह हालिया लिस्ट हुए Bharat Coking Coal Ltd. (BCCL) जैसे IPOs के बिल्कुल विपरीत है, जिनकी भारी मांग देखी गई थी। इस साल 2026 में, मेनबोर्ड IPOs का औसत लिस्टिंग गेन घटकर करीब 8% रह गया है, जो 2024 में 49% और 2025 में 10.6% था। इससे साफ है कि निवेशक अब वैल्यूएशन को लेकर ज्यादा सतर्क हैं और नए इश्यूज में जोखिम लेने से कतरा रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती तेल कीमतों ने बढ़ाया डर
Clean Max के शेयर की यह कमजोर लिस्टिंग वैश्विक बाजारों में चल रही उथल-पुथल का ही नतीजा है। सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक 1.5% तक गिरे। इसका मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आया तेज उछाल है। अमेरिका-इजराइल की स्ट्राइक्स के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई की आशंकाओं ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर चिंता बढ़ा दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतें भड़क उठी हैं, जिससे भारत के आयात बिल, महंगाई और करेंसी पर दबाव बढ़ने का खतरा है। एविएशन, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और पेंट जैसे सेक्टरों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेशक नए और अप्रमाणित शेयरों में पैसा लगाने से बच रहे हैं।
कंपनी की वैल्यूएशन और कर्ज पर उठ रहे सवाल
Clean Max, भले ही भारत की सबसे बड़ी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोवाइडर है, लेकिन इसकी वैल्यूएशन और वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लिस्टिंग प्राइस पर कंपनी का पोस्ट-IPO प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 295.6x (H1 FY26 की एनुअलाइज्ड कमाई के आधार पर) बहुत ज्यादा था। IPO प्राइस पर भी यह 386 गुना था। हालांकि, इसका EV/EBITDA मल्टीपल 16.57x पीयर कंपनियों (जैसे ACME Solar का 15.38x से Adani Green का 23.75x) की रेंज में है, लेकिन यह उन कंपनियों के बीच है जिनका स्केल और प्रॉफिटेबिलिटी कहीं ज्यादा है। इसके अलावा, कंपनी पर भारी कर्ज है। डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 2.53 है, यानी ₹10,121.46 करोड़ के कुल कर्ज के मुकाबले नेट वर्थ केवल ₹2,598.34 करोड़ है। कंपनी का रिटर्न ऑन नेट वर्थ (RoNW) सिर्फ 1.09% है, जो लिस्टेड साथियों में सबसे कम है। हालांकि मैनेजमेंट ने FY25 में प्रॉफिट में टर्नअराउंड का दावा किया है। इन सब बातों से लगता है कि निवेशक मौजूदा चुनौतीपूर्ण बाजार में प्रीमियम प्राइसिंग और कर्ज के बोझ को लेकर सतर्क हैं।
विशेषज्ञों की सलाह: अभी करें इंतजार
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को सतर्क रुख अपनाना चाहिए। Swastika Investmart की Shivani Nyati का कहना है कि लिमिटेड अपसाइड विजिबिलिटी को देखते हुए लिस्टिंग गेन वाले निवेशकों को सावधान रहना चाहिए। वहीं, जिन्हें शेयर अलॉट हुए हैं, उन्हें घबराकर बिकवाली से बचना चाहिए, बशर्ते फंडामेंटल्स मजबूत हों। नए निवेशक कीमत स्थिर होने और डिमांड सपोर्ट का इंतजार करें। Prime Database Group के Pranav Haldea के अनुसार, प्राइमरी मार्केट सेकेंडरी मार्केट का ही आईना है, और मौजूदा अस्थिरता के कारण ही IPOs में मांग कमजोर है। IPOCentral के Anil Sharma बताते हैं कि निवेशक अब सीधे रिटर्न पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) भी आवंटन घटने और कम गेन को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में, प्राइमरी मार्केट में निवेश से पहले धैर्य रखना और फंडामेंटल स्टेबिलिटी पर ध्यान देना जरूरी है।
