भारतीय शेयर बाजार में हलचल तेज है। Carlsberg ने आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग के लिए ड्राफ्ट पेपर्स जमा कर दिए हैं, जबकि Pernod Ricard और Coca-Cola भी अपने कदम आगे बढ़ा रहे हैं। इन ग्लोबल जायंट्स की योजना भारत के बढ़ते कंजम्पशन मार्केट का फायदा उठाने की है।
भारत के तेजी से बढ़ते मार्केट को देखते हुए तीन बड़ी ग्लोबल बेवरेज कंपनियां अपनी भारतीय यूनिट्स को शेयर बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। यह कदम कंपनियों के लिए अपनी वैल्यू अनलॉक करने और घरेलू निवेशकों को साथ जोड़ने का एक बड़ा जरिया बन रहा है।
Carlsberg की लिस्टिंग प्रक्रिया
फिलहाल इस दौड़ में Carlsberg सबसे आगे है। कंपनी ने 29 अक्टूबर, 2026 को SEBI के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) फाइल किया है। इस IPO में साउथ एशियन ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 8.64 करोड़ शेयरों का 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) लाया जा रहा है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि OFS में कंपनी नए शेयर नहीं जारी करती, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर अपना हिस्सा बेचते हैं। इससे मिलने वाली रकम कंपनी के एक्सपेंशन में नहीं, बल्कि बेचने वाले हिस्सेदारों के पास जाती है।
Pernod और Coca-Cola की क्या है रणनीति?
Pernod Ricard India अपनी लिस्टिंग के लिए जरूरी कानूनी और ऑपरेशनल ढांचे को दुरुस्त कर रही है, जिसमें कंपनी को पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदलना शामिल है। वहीं दूसरी ओर, The Coca-Cola Company अपनी भारतीय बॉटलिंग यूनिट, हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स (HCCH) को 2027 तक लिस्ट करने पर विचार कर रही है। इसमें जुबिलेंट भरतिया ग्रुप की 40% और कोका-कोला की 60% हिस्सेदारी है।
निवेशकों के लिए काम की बातें
निवेशकों को इन IPOs को लेकर सतर्क रहना चाहिए। पहला, हर इश्यू SEBI के कड़े नियमों और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है। दूसरा, OFS और फ्रेश इश्यू के बीच का फर्क समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि फ्रेश इश्यू से कंपनी के पास पैसा आता है, जबकि OFS सिर्फ एग्जिट रूट देता है। इसके अलावा, बेवरेज सेक्टर सरकारी एक्साइज ड्यूटी और पॉलिसी में बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील होता है, जिसका असर भविष्य में मुनाफे पर पड़ सकता है।
