Bonfiglioli Transmissions की बाजार में सुस्त शुरुआत हुई है। शेयर अपने ₹586 के इश्यू प्राइस पर ही लिस्ट हुआ है, जिससे लिस्टिंग गेन की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों को निराशा हाथ लगी है।
लिस्टिंग में निवेशकों को क्यों हुई निराशा?
Bonfiglioli Transmissions के शेयरों की बाजार में एंट्री एकदम सपाट रही। शेयर अपने IPO प्राइस ₹586 पर ही लिस्ट हुआ, जबकि ग्रे मार्केट में 11% तक के लिस्टिंग गेन की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि, सब्सक्रिप्शन के दौरान जबरदस्त क्रेज देखने को मिला था और इश्यू 46 गुना से ज्यादा भर गया था, लेकिन लिस्टिंग डे पर यह उत्साह कायम नहीं रह सका।
सब्सक्रिप्शन के आंकड़े और डिमांड
कंपनी के IPO को संस्थागत निवेशकों (QIBs) का जबरदस्त समर्थन मिला था, जहां यह हिस्सा 120.78 गुना सब्सक्राइब हुआ था। रिटेल और अन्य निवेशकों ने भी बढ़-चढ़कर बोली लगाई थी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारी ओवर-सब्सक्रिप्शन मांग का संकेत जरूर देता है, लेकिन लिस्टिंग के दिन शेयर की कीमत पूरी तरह से डिमांड-सप्लाई के गणित पर निर्भर करती है।
OFS का स्ट्रक्चर समझना जरूरी
इस ₹2,534 करोड़ के IPO की सबसे अहम बात यह थी कि यह पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) था। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों ने अपने हिस्से बेचे हैं। इस प्रोसेस से जुटाई गई रकम कंपनी के पास नहीं गई है, यानी कारोबार विस्तार के लिए कंपनी को इस IPO से कोई नई पूंजी नहीं मिली है।
फंडामेंटल्स और कंपनी का प्रदर्शन
Bonfiglioli Transmissions इटली की Bonfiglioli S.p.A की सब्सिडियरी है। कंपनी मैकेनिकल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में गियरबॉक्स और ड्राइव सिस्टम बनाने का काम करती है। 2023 से 2025 के दौरान कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी की रेवेन्यू, EBITDA और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स की ग्रोथ दर 9.2%, 23.3% और 27.4% रही है। वहीं, साल 2025 में कंपनी का रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड (ROCE) 33.5% दर्ज किया गया, जो इसे सेक्टर की अन्य कंपनियों के मुकाबले मजबूत बनाता है।
निवेशकों के लिए सलाह
जिन निवेशकों को शेयर अलॉट हुए थे, उनके लिए यह फ्लैट लिस्टिंग सबक है कि IPO में लिस्टिंग गेन बाजार के सेंटीमेंट पर चलते हैं, न कि हमेशा कंपनी के परफॉर्मेंस पर। फिलहाल निवेशकों की नजर कंपनी के अगले तिमाही नतीजों और उसके ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड पर होनी चाहिए। आने वाले दिनों में वॉल्यूम को ट्रैक करना जरूरी होगा ताकि यह समझ सके कि क्या शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स शेयर से बाहर निकल रहे हैं या लॉन्ग-टर्म निवेशक इसे खरीद रहे हैं।
